कैलाश मानसरोवर को शिव-पार्वती का घर माना जाता है। पुराणों के अनुसार इस स्थान को 12 ज्योतिर्लिंग में सर्वश्रेष्ठ माना गया है। कैलाश बर्फ से आच्छादित 22,028 फुट ऊंचे शिखर और उससे लगे मानसरोवर को कैलाश मानसरोवर तीर्थ कहते हैं और इस प्रदेश को मानस खंड कहते हैं। मानसरोवर झील इलाके में 320 वर्ग किलोमाटर के क्षेत्र में फैली है। इसके उत्तर में कैलाश पर्वत और पश्चिम में राक्षसताल है। यह समुद्रतल से लगभग 4556 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है। मान्यता है कि मानसरोवर झील सर्वप्रथम भगवान ब्रह्मा के मन में उत्पन्न हुई थी इसलिए मानसरोवर कहते हैं क्योंकि ये मानस और सरोवर से मिलकर बनी है जिसका शाब्दिक अर्थ होता है, मन का सरोवर। यहां देवी सती के शरीर का दायां हाथ गिरा था। इसलिए यहां एक पाषाण शिला को उसका रूप मानकर पूजा जाता है।
उत्तराखंड के रास्ते कैलाश मानसरोवर यात्रा को निर्बाध और सुगम बनाया जाना आवश्यक है। भारत की ओर से आयोजित की जाने वाली यात्रा अब भी कठिन है। दूसरी तरफ अनेक निजी संचालक हेलीकॉप्टर और दूसरे संसाधनों से दूसरे रास्तों से सुविधाजनक यात्रा कराते हैं। जहां तक यात्रियों की संख्या बढ़ाने का सवाल है तो वह केवल सरकार की ओर से सुविधा बढ़ाने से ही संभव नहीं है बल्कि इसके लिए चीन और भारत दोनों की सहमति होनी जरूरी है। मौजूदा हालात में यह कहां तक संभव हो पाएगा, यह विचारणीय है।
-पद्श्री अनूप साह, जाने माने फोटोग्राफर और पर्वतारोही
हर वर्ष एक हजार से अधिक लोग कैलाश मानसरोवर की यात्रा करते हैं, लेकिन इस बार कोरोना के कारण यात्रा शुरू नहीं होने से करोड़ों का नुकसान निगम को उठाना पड़ा है। यात्रा शुरू होती है तो जिले में स्थित केमएवीएन के गेस्ट हाउसों की करोड़ों की आय होगी और यात्रा से जुड़े पौनी-पोर्टर्स, वाहन संचालकों और स्थानीय व्यापारियों की आर्थिक स्थिति मजबूत होगी। यदि सांसद बलूनी के प्रयासों से यात्रा का विस्तार होता है तो यह सोने में सुहागा होगा। पर्यटन की दृष्टि पिथौरागढ़ के लिए यात्रा का बड़ा महत्व है। यात्रा नहीं होने से लोग सीमांत को भूल चुके हैं।
-दिनेश गुरुरानी, अध्यक्ष कुमाऊं मंडल विकास निगम कर्मचारी महासंघ