चमोली में आई आपदा के बाद केंद्रीय जल आयोग ने धौलीगंगा, ऋषिगंगा, मंदाकिनी, अलकनंदा और भागीरथी समेत राज्य की सभी नदियों की चौबीसों घंटे निगरानी करने के आदेश जारी किए हैं। आयोग के विशेषज्ञों की टीम गढ़वाल व कुमाऊं क्षेत्र की नदियों की हर एक घंटे की रिपोर्ट केंद्रीय जल आयोग को भेज रही है।
केंद्रीय जल आयोग के अधिशासी अभियंता आशीष कुमार सिंघल ने बताया कि वैसे तो ठंड के मौसम में 24 घंटे के भीतर सिर्फ तीन बार नदियों के जलस्तर की मॉनिटरिंग की जाती है। लेकिन अब लगातार नजर रखी जा रही है। नदियों के जलस्तर की हर घंटे पर रिपोर्ट आयोग को भेजी जा रही है। यह रिपोर्ट को राज्य सरकार व राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण को भी मुहैया कराई जा रही है। नदियों मॉनिटरिंग के लिए जोशीमठ से लेकर हरिद्वार तक जगह-जगह विशेषज्ञों की तैनाती की गई है। अधिशासी अभियंता आशीष कुमार सिंघल के अनुसार आपदा के बाद नदियाें के जलस्तर में बढ़ोत्तरी नहीं दर्ज की गई है।
26 मृतकों के परिवार और 11 घायलों को दी सहायता राशि
ऋषिगंगा की आपदा में लापता हुए लोगों के परिजनों और घायलों को सहायता राशि दी जा रही है। डीएम स्वाति एस भदौरिया ने बताया कि मुख्यमंत्री के निर्देशों के तहत अब तक 26 मृतकों के परिजनों और 11 घायलों को सहायता राशि दी जा चुकी है। जबकि एक परिवार को घर बनाने के लिए अनुदान राशि दी है। क्षेत्र में प्रभावित परिवारों को मदद पहुंचाने का काम जारी है। स्वास्थ्य शिविरों में अब तक 1929 लोगों का स्वास्थ्य जांचा जा चुका है। कहा कि आपदा प्रभावित क्षेत्रों की लगातार मॉनीटरिंग की जा रही है।
राज्य सरकार के नियमों के अनुसार मुआवजा देगी एनटीपीसी
एनटीपीसी के महाप्रबंधक राजेंद्र प्रसाद अहिरवार ने कहा कि एनटीपीसी राज्य सरकार के नियमों के अनुसार ही मुआवजा देगी। कंपनी में कार्यरत जो लोग इस आपदा में मारे गए या लापता हैं उनके परिवार को 20 लाख रुपये मुआवजा दिया जाएगा। राज्य सरकार जिसे मुआवजा देगी उसे कंपनी की तरफ से भी मुआवजा दिया जाएगा। भविष्य में काम के जरूरत के अनुसार हमारे जो कर्मचारी नहीं रहे या लापता हैं उनके किसी एक आश्रित को पात्रता के अनुसार काम दिया जाएगा। एनटीपीसी में काम करने वालों में से अभी तक 19 लोगों के शव मिल चुके हैं, जिसमें टनल से 13 और अन्य जगह से छह शव शामिल हैं।