गैर आईएएस अधीनस्थ काम नहीं करने की जिद पर अड़े उत्तराखंड के दो आईएएस अफसरों को सरकार ने संबंधित विभागों से कार्यमुक्त तो कर दिया, लेकिन इससे आईएएस लॉबी में नाराजगी बढ़ गई है।
सरकार ने आईएएस अफसरों की नहीं सुनी
क्योंकि सरकार ने दोनों ही मामलों में आईएएस अफसरों की नहीं सुनी। अब सरकार और एसोसिएशन के बीच न्यायिक लड़ाई शुरू होने के आसार हैं। आईएएस एसोसिएशन ने शुरू से ही आईटीएस अफसर दीपक गैरोला को शासन में सचिव के पद पर नियुक्त करने का विरोध किया था।
फरवरी से लेकर अक्तूबर तक मामला लटका रहा, लेकिन सीएम की जिद के चलते गैरोला को शासन में सचिव नियुक्त करना पड़ा। उन्हें आईटी विभाग दिया गया। जिस समय गैरोला सचिव बने उस समय आईटी निदेशक व अपर सचिव का चार्ज रंजीत सिन्हा के पास था और महकमे में मनीषा पंवार प्रमुख सचिव भी थीं।
इसलिए सिन्हा ने फाइल ना तो कभी गैरोला को भेजी और ना ही किसी बैठक में गए। इसी बीच रविनाथ रमन ट्रेनिंग से वापस आए और प्रमुख सचिव मनीषा पंवार केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर चली गईं।
अब विभाग के मुखिया के तौर पर सचिव गैरोला ही रहे, लेकिन रमन ने फाइल गैरोला को ना भेजकर मुख्य सचिव से निर्णय कराना शुरू कर दिया। इसलिए रमन को हटना पड़ा। अब इस मामले में एसोसिएशन और सरकार के बीच टकराव की स्थिति बन रही है।
पोस्टिंग के विरोध में दाखिल होगी रिट
एसोसिएशन के सचिव उमाकांत पंवार पहले ही कह चुके हैं कि सचिव के पद पर गैर आईएएस की पोस्टिंग के विरोध में रिट दाखिल होगी। हरबंश सिंह चुघ को भी एनआरएचएम निदेशक के पद से हटाने के पीछे भी डीजी हेल्थ को रिपोर्ट करने की व्यवस्था का विरोध करना था।
लड़ाई इसी बात पर थी कि सभी राज्यों में एनआरएचएम निदेशक ही योजना को पूरी तरह संचालित करता है। यूपी जैसे राज्य में तो कार्यालय ही अलग है। लेकिन यहां व्यवस्था नहीं बदली।
कई समिति ऐसी हैं जिनके चेयरमैन प्रमुख सचिव हैं और सचिव डीजी हेल्थ। जबकि अन्य राज्यों में मिशन डायरेक्टर के पास अधिकार हैं। यह मामला भी अब एसोसिएशन के प्लेटफार्म पर आ चुका है।