बिना जांच और डॉक्टर की सलाह के कुछ लोग बार-बार होने वाली बीमारियों में मेडिकल स्टोर से दवा खा रहे हैं। कुछ समय के लिए तो इन दवाओं से मरीज ठीक हो जाता है, लेकिन बाद में यह खतरनाक साबित होने लगते हैं। शहर के विभिन्न टीबी क्लीनिकों में भी इस तरह के मरीज पहुंच रहे हैं। ज्यादा समय तक अनापशनाप दवाएं लेने से मरीजों में टीबी (क्षय रोग) खतरनाक स्वरूप ले रहा है।
डॉक्टरों के मुताबिक, बुखार, सिर दर्द, बदन में दर्द, खांसी, भूख कम लगना, सांस फूलने आदि तमाम दिक्कतें होने पर कई लोग आमतौर पर बिना डॉक्टर की सलाह के मेडिकल स्टोर से दवा ले लेते हैं। लंबे समय तक ऐसा करना खतरनाक और यहां तक कि जानलेवा भी हो सकता है। ऐसा ही कुछ टीबी मरीजों के साथ भी हो रहा है। राजकीय दून मेडिकल कॉलेज अस्पताल के पूर्व टीबी एवं छाती रोग विशेषज्ञ डॉ. विपिन चौधरी ने बताया कि बिना डॉक्टर की सलाह के दवाओं के अत्यधिक सेवन से कई मरीजों में टीबी की स्थिति खतरनाक हो रही है। बिना बीमारी को जाने अत्यधिक दवाएं लेने से बीमारी ठीक होने की बजाय बढ़ने लगती है।
दरअसल, इस स्थिति में मरीज के शरीर में बहुत सी दवाओं के प्रति प्रतिरोधक क्षमता विकसित होने लगती है। जिससे कम क्षमता की दवा असर नहीं करती हैं। ऐसे में मरीज को अधिक क्षमता की दवाएं देनी पड़ती हैं। अधिक क्षमता की एंटीबायोटिक दवाएं देने से किडनी और लीवर समेत विभिन्न अंगों पर विपरीत असर पड़ता है। इस वजह से मरीज को अस्पताल में भर्ती करने, जांच, ठीक होने के समय और खर्च भी अधिक बढ़ जाता है।
राजकीय जिला कोरोनेशन अस्पताल के वरिष्ठ फिजिशियन डॉ. एनएस बिष्ट ने बताया कि बिना डॉक्टर की सलाह के कोई भी दवा लेना आमतौर पर ठीक नहीं रहता है। लंबे समय तक खांसी, बलगम आना, भूख कम लगना, पेट दर्द जैसी समस्या हो तो डॉक्टर की सलाह पर एक्सरे और जरूरी जांच अवश्य कराएं। मधुमेह (डायबिटीज), घर के बाहर रहने वाले किशोरों जो समय पर खाना नहीं खा पाते, स्तनपान कराने वाली महिलाएं जो समुचित पौष्टिक आहार नहीं लेती और मानसिक बीमारियों से पीड़ित मरीज में टीबी होने का जोखिम ज्यादा होता है।
बिना डॉक्टर की सलाह के सोशल मीडिया पर पढ़कर या देख सुनकर खुद ही दवाएं लेना उचित नहीं है। दवा विक्रेताओं को इस बारे में स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि वह निर्धारित दवाओं को बिना डॉक्टर की सलाह के न दें। टीबी का इलाज संभव है लेकिन दवाओं के अनापशनाप सेवन से यह खतरनाक रूप ले सकता है। जिले में स्वास्थ्य विभाग की ओर से दून अस्पताल, कोरोनेशन अस्पताल समेत 21 जगह टीबी जांच और दवाओं की निशुल्क व्यवस्था की गई है। टीबी के लक्षण दिखने पर मरीज इन केंद्रों पर जाकर जांच करा सकते हैं। जरूरत के हिसाब से डॉक्टर की सलाह पर दवा लें।
-डॉ. मनोज वर्मा, जिला क्षय नियंत्रण अधिकारी
- यह लक्षण हों तो कराएं टीबी की जांच -
- लंबे समय तक छाती में दर्द रहना, खून के साथ बलगम आना, शरीर में सुस्ती और थकावट, अत्यधिक पसीना, बुखार, भूख न लगना, मांसपेशियों में दर्द, सांस फूलना, सूखी या बलगम वाली खांसी और बिना कारण वजन में कमी होने की शिकायत लगे तो अस्पताल जाकर टीबी की जांच कराएं और डॉक्टर की सलाह पर दवाएं लें।