जिला कारागार में सीता का किरदार निभा रहे रोहिता कहते हैं कि रामायण ने मेरे मन को बदला है। पति-पत्नी का रिश्ता एक दूसरे की समझ पर टिका है। दोनों का फर्ज है कि कहीं बाधा आए तो मिलकर सुलझाएं। भगवान राम का पात्र निभा रहे दीपक कहते हैं, काश, मैंने रामायण को पहले पढ़ लिया होता। रिहर्सल के दौरान हर पात्र को करीब से समझा। मर्यादा का पालन सीख लिया है।
25 बंदी निभा रहे पात्रों का किरदार
जिला कारागार रोशनाबाद में चल रही रामलीला में 25 बंदी विभिन्न पात्रों का किरदार निभा रहे हैं। मंच का संचालन जितेंद्र सैनी, विष्णु, राम व श्रवण का किरदार दीपक भट्ट, लक्ष्मण का किरदार डूंगर सिंह, सीता व लक्ष्मी का किरदार रोहित, भरत का किरदार अंकित, शत्रुघन का किरदार अंकुश निभा रहे है।
पात्रों के श्रृंगार से लेकर जेल की सजावट का थामा जिम्मा
कारागार में चल रही रामलीला में पात्रों का अभिनय निभाने वाले बंदियों से लेकर मच की सज्जा व ढोल बजाने का काम बंदी ही कर रहे हैं। पात्रों के श्रृंगार का जिम्मा शोभाराम को दिया हुआ है। वहीं संगीतकार, गीतकार उमेश, ढोलक कलाकार लालूराम, और उनके सहयोगी नरेंद्र कुमार है। नृत्य की जिम्मेदारी विपिन कुमार व सौरभ, लेखक की जिम्मेदारी डॉक्टर शोभित कुमार अग्रवाल निभा रहे हैं।
बंदी मनोज माहेश्वरी हैं रामलीला के डायरेक्टर
रामलीला के पात्रों का चयन, भजन, कीर्तन, वेशभूषा और डायलॉग सभी कुछ बंदी मनोज माहेश्वरी के निर्देशन में चल रहा है। उन्हें रामलीला के दोहे कंठस्थ हैं। उन्होंने कहा बुराई का आखिर में अंत ही होता है और यह सत्य सबको समझना चाहिए इससे सभी के दिमाग मे कुछ अच्छी सोच पैदा होगी।
रामलीला सांस्कृतिक पर्व होने के साथ सामाजिक संदेश भी देता है, इसलिए बंदियों के बीच बंदियों के द्वारा रामलीला का आयोजन करवाया गया। ताकि इनपर कुछ सकारात्मक असर हो और बाहर निकलकर से लोग अच्छी जिंदगी बिता सकें।
- मनोज कुमार आर्या, वरिष्ठ जेल अधीक्षक हरिद्वार