प्रथम चरण में कार्य पांवटा के वाता पुल से शुरू होगा और शिमला बाइपास व धर्मावाला अंतिम गांव मेदनीपुल तक होगा। इस पर 605.36 करोड़ की लागत आएगी। दूसरे चरण में मेदनीपुर से शुरू होकर हरबर्टपुर, सहसपुर, सेलाकुई और सुद्धोवाला, प्रेमनगर से होते हुए बल्लूपुर चौक पर खत्म होगा। इस पर 1141 करोड़ की लागत आएगी।
इस परियोजना से उत्तराखंड के 21 और हिमाचल के चार गांव प्रभावित होंगे। निजी नाप भूमि के अधिग्रहण की प्रक्रिया अग्रिम चरण में है। नौ गांवो में मुआवजा आवंटन की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। शेष की प्रक्रिया अगले 15 दिन पूरी हो जाएगी। पहले चरण की वनीय स्वीकृति दो तीन दिन में मिलने की संभावना है।
दोनों पैकेज की निविदाएं की
एनएचएआई ने परियोजना के दोनों पैकेज की निविदाएं कर ली हैं। अगले 25 से 30 दिन में बोलीदाता भी तय हो जाएंगे। अगले तीन महीनों यानी जून महीने से प्रोजेक्ट पर कार्य आरंभ हो जाएगा।
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ईंधन बचेगा, दबाव घटेगा, पर्यटकों को मिलेगी सुविधा
इस परियोजना के निर्माण से दिल्ली से आने वाले पर्यटकों को भीड़भाड़ वाले दून शहर में दाखिल नहीं होना पड़ेगा। वे दिल्ली एक्सप्रेस हाईवे (जिस पर कार्य शुरू होने वाला है) से होकर ग्रीन फील्ड फोरलेन से मसूरी या अन्य पर्यटक स्थलों को जा सकेंगे। औद्योगिक क्षेत्र होने के नाते कारोबारियों और परिवहन को भी सुविधा होगी। करीब सात किमी की दूरी कम हो जाएगी। इससे ईंधन और समय दोनों बचेंगे। साथ ही ट्रैफिक का दबाव कम होगा।