बिजली विभाग के अफसरों-कर्मचारियों की लापरवाही और गलतियां अब उपभोक्ताओं पर भारी साबित नहीं होंगी। नियामक आयोग ने इसके समाधान के लिए कंसलटेंटिव कमेटी बनाने का निर्णय लिया है। नियामक आयोग के अध्यक्ष डीपी गैरोला और सदस्य तकनीकी एमके जैन ने बताया कि उपभोक्ताओं की तमाम समस्याओं की सुनवाई और व्यवस्था को दुरुस्त करने के लिए एक कंसलटेंटिव समिति का गठन किया जा रहा है।
उन्होंने बताया कि इस समिति में विभिन्न एसोसिएशन, व्यापार मंडल से लेकर आम जन भी शामिल होंगे। हर तीन माह पर समिति की बैठक होगी। बैठक में जो भी समस्याएं सामने आएंगी, उनका समाधान कराया जाएगा। ताकि उपभोक्ताओं और यूपीसीएल के बीच सामंजस्य भी बना रहे और परेशानियां भी न हों।
हिमाच्छादित क्षेत्रों के लिए हर साल जारी होता है टैरिफ, लाभार्थियों का पता नहीं
प्रदेश में कई जिलों में हिमाच्छादित क्षेत्र मानते हुए नियामक आयोग हर साल उनका बिजली टैरिफ अलग से जारी तो करता है लेकिन इसका लाभ लेने वाला कोई नहीं है। आज तक सरकार हिमाच्छादित क्षेत्रों को चिह्नित ही नहीं कर पाई है। दरअसल, चमोली, उत्तरकाशी, पिथौरागढ़ जैसे कई पर्वतीय जिलों में कई इलाके ऐसे हैं, जहां काफी लंबे समय तक बर्फ पड़ी रहती है।
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यहां जो लोग रहते हैं, उन्हें बिजली की ज्यादा जरूरत होती है या फिर लोग यहां से पलायन कर जाते हैं। लिहाजा, नियामक आयोग इनके लिए रियायती दरों पर टैरिफ जारी करता है। इस बार भी आयोग ने टैरिफ जारी किया है। आज तक राज्य सरकार यह तय ही नहीं कर पाई है कि हिमाच्छादित क्षेत्र कौन से हैं। इस वजह से इस रियायती टैरिफ का लाभ कोई भी बिजली उपभोक्ता नहीं ले पाया है।