chardham yatra 2021: शुक्रवार को अन्नकूट पर्व पर पूर्वाह्न 11:45 बजे गंगोत्री धाम के कपाट शीलकाल के लिए बंद हो गए। इसके बाद गंगा की भोग मूर्ति अपने मायके मुखबा (मुखीमठ) स्थित गंगा मंदिर के लिए डोली यात्रा के साथ रवाना हुई।
शीतकाल के लिए चार धामों के कपाट बंद होने का सिलसिला शुरू हो गया है। शुक्रवार को गंगोत्री धाम के कपाट विधिविधान के साथ बंद कर दिए गए हैं। इस दौरान धाम में बड़ी संख्या में भक्त मौजूद रहे।
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यमुनोत्री धाम के कपाट शनिवार को बंद होने जा रहे
वहीं गंगोत्री व यमुनोत्री धाम के शीतकालीन पड़ाव मुखबा और खरसाली में मां गंगा और यमुना के स्वागत की तैयारियां शुरू हो गई हैं। यमुनोत्री के कपाट शनिवार को बंद होने जा रहे हैं। इसके बाद शीतकाल के छह माह मां गंगा और यमुना के दर्शन शीतकालीन पड़ावों में ही होंगे।
शुक्रवार को अन्नकूट पर्व पर पूर्वाह्न 11:45 बजे गंगोत्री धाम के कपाट शीलकाल के लिए बंद हो गए। इसके बाद गंगा की भोग मूर्ति अपने मायके मुखबा (मुखीमठ) स्थित गंगा मंदिर के लिए डोली यात्रा के साथ रवाना हुई। एक दिन लंका स्थित भैरव मंदिर में रात्रि विश्राम के बाद अगले दिन मुखबा पहुंचेगी।
खरसाली स्थित मां यमुना के मंदिर को सजाने के लिए मंगाए गए फूल
इसके लिए मंदिर को भव्य ढंग से सजाया जाएगा। वहीं केदारनाथ और यमुनोत्री धाम के कपाट भैयादूज पर शनिवार को बंद होंगे। शनिवार को सुबह यमुनोत्री के शीतकालीन पड़ाव खरसाली से समेश्वर देवता (शनि देव) की डोली अपनी बहन यमुना को लेने धाम पहुंचेगी।
आगामी 20 नवंबर को शीतकाल के लिए बंद होंगे बदरीनाथ के कपाट
पुरोहित प्यारेलाल उनियाल ने बताया कि खरसाली स्थित मां यमुना के मंदिर को सजाने के लिए फूल मंगाए गए हैं। मंदिर को भव्य तरीके से सजाया जाएगा। बदरीनाथ धाम के कपाट आगामी 20 नवंबर को शीतकाल के लिए बंद किए जाएंगे।