राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने मंगलवार को सुप्रसिद्ध पर्यावरणविद और गांधीवादी चंडी प्रसाद भट्ट को गांधी शांति पुरस्कार से सम्मानित किया। राष्ट्रपति भवन के दरबार हाल में आयोजित एक समारोह में वर्ष 2013 के लिए यह पुरस्कार दिया गया।
इस मौके पर राष्ट्रपति ने पर्यावरण संरक्षण के लिए उनके अथक और अमूल्य कार्यों की सराहना भी की।
राष्ट्रपति ने इस मौके पर कहा कि यह ध्यान रखना चाहिए कि हम सभी महात्मा गांधी की धरोहर के धरोहरी हैं। एक धरोहरी होने के नाते यह सभी का पवित्र कर्तव्य बनता है कि उनकी इस धरोहर को सुरक्षित और संरक्षित रखें। यही मानवता की परंपरा है।
भट्ट का जीवन संदेश की तरह: राष्ट्रपति
राष्ट्रपति ने कहा कि भट्ट को इस पुरस्कार से सम्मानित करते हुए वह उन सभी अनगिनत महिलाओं और पुरुषों का सम्मान कर रहे हैं, जो प्रकृति के धरोहरी बनकर स्वराज को अपना रहे हैं।
राष्ट्रपति ने कहा कि भट्ट हमारे समय के जीवन पर्यंत गांधीवादी, दूरदृष्टि के आधुनिक पर्यावरणविद हैं, जिनका जीवन एक संदेश की तरह है। चिपको अभियान उन्हीं की ओर से 1973 में शुरू किया गया था।
यह एक ऐसा अहिंसात्मक सत्याग्रह आंदोलन था, जिसने पहाड़ में रहने वाले लोगों के लकड़ी और चारे के अधिकार की लड़ाई लड़ी साथ ही वनों के कटाव को रोकने के लिए प्राकृतिक आपदाओं से बचाने का अभियान छेड़ा।
पूर्व पीएम मनमोहन सिंह रहे मौजूद
इस मौके पर पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह, संस्कृति और पर्यटन राज्य मंत्री श्रीपाद यशो नाइक भी मौजूद थे। संस्कृति और पर्यटन मंत्रालय की ओर से यह पुरस्कार साल 1955 में शुरू किया था।
इसके अंतर्गत एक करोड़ रुपये का नकद पुरस्कार, पट्टिका और प्रशस्ति पत्र दिया जाता है। 80 वर्षीय भट्ट को उनके कार्यों के लिए साल 2005 में पद्म भूषण से सम्मानित किया जा चुका है।
साथ ही 1982 में उन्हें रमन मैगसेसे पुरस्कार भी दिया जा चुका है। वह भारत के पहले आधुनिक पर्यावरणविदों में से एक हैं।