केदारधाम यात्रा को सुचारु बनाने के लिए सरकार बेशक पूरे प्रण-प्राण के साथ जुटी हो मगर जमीनी हकीकत यह है कि धाम के दर्शन के सामने चुनौतियों के पहाड़ खड़े हैं।
खराब और पल-पल रंग बदलता मौसम यात्रा की सबसे बड़ी सबसे बड़ी चुनौती के रूप में सामने आ रहा है। जिधर निगाह जाती है केदार धाम और आसपास के इलाके बर्फ से अटे पड़े हैं। मौसम विभाग की मानें तो अप्रैल का महीना भी बारिश और बर्फबारी का ही होगा।
पिछले साल 18 अप्रैल को केदारनाथ में बर्फ पड़ी थी। हालांकि यात्रा मई में शुरू हुई थी। इस बार बर्फबारी ज्यादा है। मौसम विभाग का अनुमान है कि अप्रैल के दूसरे पखवाड़े में भी पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय हो सकता है। ऐसे में 24 अप्रैल से शुरू हो रही यात्रा मे यात्रियों को पैदल रास्ते पर नौ हिमस्खलन क्षेत्रों का सामना करना पड़ सकता है।
हालांकि इससे निपटने के लिए एसडीआरएफ और निम की टीम यहां मौजूद होगी। पर इनका काम काफी पेचीदा हो जाएगा। बर्फ और खराब मौसम केदारनाथ को सजाने संवारने में लगी टीम के लिए भी चुनौती खड़ी करेगा।
स्थानीय लोगों की यात्रा से दूरी भी बनेगी मुसीबत
केदारनाथ यात्रा को अपनी नाक का सवाल बना चुकी सरकार स्थानीय लोगों को शामिल नहीं कर पाई है, यह भी एक बड़ी दिक्कत है। यात्रा को पूरी तरह से अपने हाथ में लेने के कारण स्थानीय निवासी यात्रा से दूर हैं।
गौरीकुंड से लेकर केदारनाथ तक के रास्ते में भोजन और सामान की दुकानें इस बार भी गढ़वाल मंडल विकास निगम के पास हैं। घोड़े, डंडी कंडी वालों में भी बहुत ज्यादा उत्साह नहीं है।
ऐसे में यात्रा का प्रबंधन पूरी तरह से सरकारी अमले पर निर्भर होगा। ऐसे में सरकार के सामने पर्यटन को पटरी पर लाने और स्थानीय आर्थिकी को मजबूत करने का लक्ष्य हासिल करना टेढ़ी खीर साबित होगा।
साख का सवाल जस का तस
पूरी केदार घाटी में साख का मतलब है यात्रा के भरोसे उधारी। यह उधार यह कह कर लिया जाता था कि यात्रा के बाद चुका दिया जाएगा। पर अभी केदार घाटी में यह विश्वास नहीं पनपा है। ऐसे में यात्रा से स्थानीय आर्थिकी का जुड़ाव बेहद कम हो गया है।
स्थानीय व्यापारियों में कोई उत्साह नहीं
गुप्तकाशी में इस वक्त सात होटल मालिकों को बैंक कर्ज के कारण नोटिस का सामना करना पड़ रहा है। ये होटल मालिक इस दुविधा में हैं कि यात्रा के लिए पैसे लगाएं या नहीं। यात्रा अगर पूरी तरह से नहीं चलती तो इनको दोगुना नुकसान उठाना होगा।
ऐसे में आसपास के गांवों के बाजार अगत्स्यमुनि, तिलवाड़ा, विजयनगर के बाजार तो आबाद हैं पर चार धाम यात्रा पर निर्भर गुप्तकाशी, गौरकुंड, सोनप्रयाग में रौनक नही है।
हिचकोलें खाती सड़क, भूस्खलन क्षेत्र
सड़क का काम 15 अप्रैल तक पूरा होना है। सोनप्रयाग से गौरीकुंड तक सड़क का काम अधूरा है। ऐसे में पैदल यात्रा गौरीकुंड के बजाय गौरीकुंड से दो किलोमीटर पहले से शुरू होगी। पर रुद्रप्रयाग के पास सिरोबगड़, गुप्तकाशी के पास सेमी गांव के भूस्खलन क्षेत्र सरकार को परेशान करेंगे। खराब मौसम के कारण रोड सरफेसिंग न हो पाई तो वाहनों से आने वाले यात्रियों को परेशानी होगी।
आपदा के निशान जस के तस
रुद्रप्रयाग से आगे और केदारनाथ तक आपदा के डरावने निशान जस के तस बने हुए हैं। मुआवजे और मकानों केध्वस्तीकरण का मामला न सुलझने के कारण यह सब कुछ वैसा ही है जैसा आपदा के तुरंत बाद था। यह यात्रियों को आध्यात्मिक शांति से भरने का कम और डराने का काम ज्यादा करेगा।
"स्थानीय लोगों को शामिल करने के लिए भोजन पकाने और सर्व करने के काम को आउटसोर्स किया गया है। दो निविदाएं खुल भी चुकी हैं।"
-सी रविशंकर, एमडी, गढ़वाल मंडल विकास निगम