उत्तराखंड में नसबंदी शिविरों में महिलाओं की जिंदगी के साथ खिलवाड़ हो रहा है। इसकी बानगी पौड़ी में देखने को मिली।
नौसिखिया नर्स की गलती
पौड़ी में स्वास्थ्य केंद्र में लगे शिविर में लोकल अनेस्थेसिया देते वक्त नौसिखिया नर्स ने महिला के पेट में नीडिल तोड़ दी थी। डॉक्टरों का कहना है कि मानक के मुताबिक अनेस्थसिया सिर्फ अनेस्थेटिस्ट ही दे सकता है।
दून अस्पताल के वार्ड नंबर सात के बेड नंबर चार पर भरती पौड़ी की लीलादेवी (32) ने बताया कि नर्स ने पहले उसे दो इंजेक्शन लगाए थे। एक बांह पर और एक कमर पर। इसके बाद पेट में इंजेक्शन लगाया।
फिर उसे कुछ होश नहीं। बाद में जब होश आया तो उसे दून लाया जा रहा था। डॉक्टर ने खुद ही वाहन करके उसे दून अस्पताल भेजा था।
अब हालत स्थिर
पेट में नीडिल टूट जाने के बाद वहां किसी डॉक्टर ने इसे निकाला भी नहीं। महिला को सीधे दून भेज दिया। बाद में डॉ. अंशिका अरोड़ा ने लीलादेवी के पेट से टूटी नीडिल निकाली।
इसके साथ ही उसकी नसबंदी भी कर दी। लेकिन अभी उसे नसबंदी कराने पर मिलने वाला पैसा नहीं मिला है। लीलादेवी ने बताया कि डॉक्टरों का कहना है कि पैसा पौड़ी में ही मिलेगा।