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धार्मिक और सांस्कृतिक परंपराओं को संजोए है आदिबदरी

Wed, 01 Jan 2014 03:38 PM IST
अमर उजाला, आदिबदरी
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श्रीआदिबदरी धाम उत्तराखंड के प्रमुख मंदिरों में से एक है। कर्णप्रयाग से 19 किमी. दूर स्थित 16 मंदिरों वाला यह धाम गुप्त काल के समय का है।
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हिन्दू धर्म के प्रचार-प्रसार के लिए स्थापित
यहां भगवान विष्णु की मूर्तिया हैं। जिन्हें आदिशंकराचार्य द्वारा भारत के दूर दराज के क्षेत्रों में हिन्दू धर्म के प्रचार-प्रसार के लिए स्थापित किया गया था।

हर साल भगवान विष्णु के दर्शन के लिए यहां हजारों भक्तों का तांता लगा रहा है। प्रकृति की गोद में बसे इस मंदिर की प्रसिद्घि उत्तराखंड के साथ ही पूरे देश में है। इन दिनों स्थानीय लोगों द्वारा श्रीआदिबदरी को बारामासी पर्यटन से जोड़ने की मांग फिर से जोर पकड़ने लगी है।
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मंदिर समिति के नवनियुक्त अध्यक्ष वृजयेश नवानी ने मुख्यमंत्री को ज्ञापन भेजकर श्रीआदिबदरी धाम को बारामासी पर्यटन से जोड़ने और जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराने की मांग की है।

मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा को भेजे ज्ञापन में नवानी का कहना है कि नौंवी सदी में स्थापित श्रीआदिबदरी धाम शासन-प्रशासन और विभागीय उपेक्षा का दंश झेल रहा है। पंच बदरी में प्रथम यह धार्मिक स्थल आज भी पर्यटन के मानचित्र से ओझल है।

क्षेत्र के विकास के लिए पहल
जबकि प्रतिवर्ष यात्रा के दौरान दक्षिण भारत के कई श्रद्धालु यहां दर्शनों के लिए पहुंचते हैं। बीते वर्ष आपदा के बाद भी विभिन्न प्रांतों के करीब पांच हजार से अधिक श्रद्धालुओं ने यहां पहुंचकर भगवान श्रीआदिबदरी नाथ के दर्शन किए थे।
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मंदिर समूह के रूप में स्थापित यह मंदिर धार्मिकता के साथ ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक परंपराओं को भी संजोए हुए है। ज्ञापन में मंदिर समिति अध्यक्ष ने श्रीआदिबदरी धाम सहित 37 गढ़वाल राजाओं की प्रथम राजधानी चांदपुर गढ़ी को बारामासी पर्यटन से जोड़ने की मांग की है, जिससे क्षेत्रीय विकास के साथ स्थानीय युवाओं को भी स्वरोजगार के अवसर मुहैया हो सके।
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