banas village, where narad muni do meditation
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उत्तराखंड में यमुनोत्री धाम के निकट नारद गंगा पर बना प्राकृतिक झरने के साथ तप्त कुंड सरकारी उपेक्षा का शिकार बना हुआ है। ऐसे में महर्षि नारद मुनि की तप्त स्थली के पौराणिक महत्व से तीर्थयात्री वंचित रह जाते हैं। साथ ही सरकारों के पर्यटन एवं तीर्थाटन को लेकर किए जाने वाले दावों पर भी सवाल खड़े करता है।
यमुनोत्री राजमार्ग पर हनुमानचट्टी व जानकीचट्टी के बीच नारद चट्टी से महज 500 मीटर दूर यमुना नदी के पार बनास गांव से नारद गंगा आती है। इस पर प्राकृतिक झरने के साथ ही कई तप्त कुंड भी हैं। कहा जाता है कि नारद मुनि जब चार धाम यात्रा पर निकले थे तो उनके तप एवं साधना से यहां पर जल की दो धारा निकली।
एक शीतल जल की और दूसरी गर्म जल की धारा। तब से इस नदी का नाम नारदगंगा पड़ा। यहां पर प्राकृतिक झरने के साथ-साथ कई गर्म कुंड और नारायण मंदिर भी हैं। प्रचार-प्रसार न होने से यमुनोत्री आने वाले यात्री इन तक नहीं पहुंच पाते।