इसके बाद जांच के दायरे में अगला सवाल रहा कि आखिर चांद की जमीन कौन बेच रहा है? इस सवाल के कई जवाब दिखे, जिसमें सबसे बड़ा नाम इंटरनेशनल लूनर लैंड्स रजिस्ट्री नामक जमीन बेचने वाली वेबसाइट का नाम आया है। इस वेबसाइट पर जाते ही आपको कई भाषाओं में 'अंतर्राष्ट्रीय चंद्र भूमि क्षेत्र चांद में आपका स्वागत है। चंद्र रियल एस्टेट, चंद्रमा पर संपत्ति' लिखा हुआ मिलेगा। अन्य जानकारियां दी गई हैं।
अब सवाल यह उठा कि चांद अगर कॉमन हेरिटेज है, तो यह संपत्ति यह वेबसाइट पर कैसे बिक रही है, इसका सही जवाब नहीं मिल पाया है, लेकिन यू-ट्यूब पर जब सर्च किया तो पता चला कि यह वेबसाइट दावा करती है कि कई देशों ने आउटर स्पेश में इसे जमीन बेचने के लिए अधिकृत किया है।
जब आउटर स्पेश के बारे में जानकारी हासिल किया तो पता चला कि भारत समेत लगभग 110 देशों ने 10 अक्तूबर 1967 को एक समझौता किया, जिसे आउटर स्पेश ट्रीटी के नाम से जाना जाता है। इसके मुताबिक आउटर स्पेश में चांद भी शामिल है, जो कॉमन हरिटेज है, जिसका मतलब होता है कि इसका कोई भी निजी इस्तेमाल के लिए प्रयोग नहीं कर सकता है। कॉमन हेरिजटे पूरी मानवता के लिए होता है।
आउटर स्पेश ट्रीटी औपचारिक रूप से चंद्रमा और अन्य आकाशीय निकायों सहित बाहरी अंतरिक्ष की खोज और उपयोग में देशों की गतिविधियों को नियंत्रित करने वाली सिद्धांतों पर एक संधि है। अब सवाल उठता है कि जब 110 देशों ने ऐसी संधि कर रखी है, चांद पर जमीन की खरीब-बिक्री कितनी मान्य होगी।
कुछ विधि वेत्ताओं से संपर्क किया तो पता चला कि चांद पर जमीन खरीदना भारत में गैरकानूनी है, क्योंकि इसने आउटर स्पेश ट्रीटी में हस्ताक्षर किया है। ऐसी स्थिति में चांद पर जमीन खरीदना एक कागज के टुकड़े की कीमत देना मात्र है।