अब तक राज्य में हुए चार चुनावों में भाजपा और कांग्रेस बारी-बारी से सत्ता में आते रहे हैं।
- फोटो : Amar Ujala (File Photo)
उत्तराखण्ड लगातार मुख्यमंत्री हराने वाला पहला राज्य
उत्तराखण्ड में भुवनचन्द्र खण्डूड़ी के बाद मुख्यमंत्री रहते हुए हार का सिलसिला हरीश रावत ने 2017 में जारी रखा। वह एक से नहीं बल्कि दोनों सीटों से चुनाव हार गए। उन्हें हरिद्वार ग्रामीण से भाजपा के यतीश्वरानन्द ने 12,278 मतों से तथा उधमसिंहनगर की किच्छा सीट पर राजेश शुक्ला ने 2,127 मतों से पराजित किया। इसी वर्ष गोवा के लक्ष्मीकान्त पारसेकर मुख्यमंत्री रहते हुए हारने वाले देश के पांचवें मुख्यमंत्री बने। उन्हें कांग्रेस के दयानन्द सोप्ते ने मान्द्रेम सीट पर 7,119 मतों से हराया था।
धामी के सिर अपना भी और पार्टी का भी खतरा
चूंकि उत्तराखण्ड के दूसरे विधानसभा चुनाव में पहली निर्वाचित सरकार के मुख्यमंत्री नारायण दत्त तिवारी चुनाव ही नहीं लड़े थे। इसलिए उनकी हार का सवाल ही नहीं उठता था। लेकिन उसके बाद मुख्यमंत्री निरन्तर 2012 और 2017 में हारते रहे।
अब अगला चुनाव सिर पर है। प्रदेश की नजर उधमसिंहनगर की खटीमा सीट पर लगी हुई है। इस सीट पर मुख्यमंत्री धामी का मुकाबला कांग्रेस के भुवनचन्द्र कापड़ी पर है। इन दोनों का मुकाबला 2017 में भी इस सीट पर हो चुका था। उस चुनाव में भयंकर मोदी लहर के बावजूद भुवनचन्द्र कापड़ी केवल 2,709 मतों से हारे थे।
खटीमा में किसी की भी जीत सुनिश्चित नहीं
खटीमा सीट पर दोनों प्रतिद्वन्दी प्रत्याशियों के पक्ष और विपक्ष में समीकरण बन और बिगड़ रहे हैं। दोनों प्रतिद्वन्दियों में एक के नकारात्मक समीकरण दूसरे के लिए सकारात्मक बने हुए हैं। धामी को एण्टी इनकम्बेंसी और हार का मिथक सता रहा है तो हाल के कुछ महीनों में उन्होंने जो लगभग 400 करोड़ की योजनाओं की घोषणाएं कीं वे उनकी चुनावी संभावनाओं को बढ़ाती हैं। उनके पक्ष में उनका मुख्यमंत्री का होना भी है।
धामी का व्यवहार कुशल होना भी उनके हित में ही है। लेकिन किसान आन्दोलन और खास कर सिखों की नाराजगी उनको भारी पड़ सकती है। इसीलिए कैबिनेट मंत्री यशपाल आर्य भाजपा छोड़ कर कांग्रेस में शामिल हो गए थे। उनको सबसे बड़ा खतरा अपने ही दल के भीतरघातियों से हो सकता है। उनकी कम उम्र के कारण उन्हें राजनीति में लम्बी रेस का घोड़ा माना जा सकता है बशर्ते पार्टी के अन्य दावेदार धामी का यह अश्वमेघ यज्ञ सम्पन्न होने दें..!
किसानों और सिखों की नाराजगी के बीच आप पार्टी का प्रत्याशी धामी के लिए मददगार हो सकता है। इस सीट पर लगभग 40 प्रतिशत पहाड़ी वोटर हैं जो कि पिथौरागढ़, मुन्स्यारी, लोहाघाट, चंपावत इलाके से आकर तराई में बसे हुये हैं। जबकि शेष 60 प्रतिशत वोटर थारू, सिख, बंगाली और मुसलमान है।
डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यह लेखक के निजी विचार हैं। आलेख में शामिल सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है। अपने विचार हमें blog@auw.co.in पर भेज सकते हैं। लेख के साथ संक्षिप्त परिचय और फोटो भी संलग्न करें।