प्रतिवर्ष सड़क सुरक्षा हेतू करोडों रुपया बहाया जाता है। मगर नतीजा वही ढाक के तीन पात ही निकलता है। अगर सही तरीके से पैसा खर्चा किया जाए तो देश में घटित होने वाले इन भीषण हादसों पर विराम लग सकता है। मगर ऐसा नहीं हो रहा है हर वर्ष लाखों लोग मारे जा रहे हैं।
16 फरवरी 2021, मंगलवार को सुबह करीब साढे़ सात बजे मध्यप्रदेश के सीधी में एक बस के 22 फुट गहरी बाणसागर नहर में गिरने से 47 यात्रियों की दर्दनाक मौत से हर भारतीय गमगीन है। मृतको में 12 छात्र थे, जो रेलवे की परीक्षा देने सतना जा रहे थे। सात लोगों को बचा लिया है। 32 सीटर बस में 60 लोग सवार थे। हादसे का कारण तेज रफतार माना जा रहा है। बस का चालक तैरकर नहर से बाहर आ गया
पुलिस से उसे हिरासत मे ले लिया है। सरकार ने मुआवजे का ऐलान कर दिया है। देश में बढ़ते सड़क हादसों को रोकने के लिए समय रहते संज्ञान लेना होगा। 1जनवरी 2021 से लेकर 16 फरवरी 2021 तक दो महीनों में हजारों सड़क हादसे हो चुके हैं। वर्ष 2021 के पहले सप्ताह से ही लोग सड़क हादसों में मारे जा रहें है। प्रतिदिन हादसों में लोग मारे जा रह हैं।
11 से 20 जनवरी 2021 तक पूरे भारतवर्ष में सड़क सुरक्षा सप्ताह मनाया गया। मगर ऐसे आयोजन औपचारिकता भर रह गए हैं। क्योकि प्रशासन द्वारा लोगों को इन सात दिनों में यातायात नियमों के बारे में बताया जाता है फिर पूरा वर्ष लोग अपनी मनमानी करते हैं और यातयात नियमों का उल्लंघन करते हैं और मौत के मुंह में समाते जा रहे हैं। देश में हर चार मिनट में एक व्यक्ति सड़क हादसे में मारा जाता है। प्रतिदिन देश की सडकें रक्तरजित हो रही हैं। नौजवानों से लेकर बुजुर्ग काल का ग्रास बन रहे हैं।
आंकडें बताते है कि सड़क दुर्घटनाओं में भारत अन्य देशों के मुकाबले से शीर्ष पर है। 28 जुलाई 2018 को महाराष्ट्र के रायगढ़ जिले में शनिवार दोपहर को चालक के नियंत्रण खोने से एक बस 500 फुट खाई में गिर गई। हादसे में 33 लोगों की दर्दनाक मौत हो गई। मारे गए लोग विश्वविद्यालय के कर्मचारी थे। बस कोकण क्षेत्र में एक कृषि विश्वविद्यालय के इन कर्मचारियों को पिकनिक के लिए महाबलेश्वर ले जा रही थी।
पल भर में ही मौत की नींद सो गए। अभागे लोगों ने सपने में भी नहीं सोचा होगा कि उनकी इतनी दर्दनाक मौत होगी। अभी बीते 1 जुलाई 2018 को उतराखंड के गढ़वाल मंडल के पौड़ी जिले के नैनीडांडा विकास खंड के पिपली भौन मोटर मार्ग पर धूमाकोट के नजदीक यात्रियों से भरी एक बस के 70 फुट गहरी खाई में गिर जाने से 50 लोगों की दर्दनाक मौत हो गई थी। बस में मरने वालों में 22 पुरुष तथा 17 महिलाएं और आठ बच्चे शामिल थे।
कुछ माह पहले एक भीषण हादसा पश्चिम बंगाल में हुआ था। मुर्शिदाबाद जिले के इस्माइलपुर में एक सरकारी बस के नदी में गिरने से 36 यात्रियों की मौत हो गई थी। यह बस नदी पर बनी रेलिंग तोड़कर नदी में जा गिरी थी। 9 यात्रियों ने तैर कर अपनी जान बचा ली तथा 9 लोग घायल हो गए। बस में 60 यात्री सफर कर रहे थे। शराब पीकर वाहन चलाना ही हादसों का मुख्य कारण माना जा रहा है। इसके कारण ही लाखों लोग सड़क हादसों में मौत का शिकार हुए हैं।
हादसों की सूची बढ़ती ही जा रही है। 26 अप्रैल को कुशीनगर में चालक की घोर लापरवाही से हुए एक हादसे में कई घरों के चिराग चिरनिंद्रा में सो गए थे। 2018 को एक भीषण हादसा कांगड़ा के नूरपुर के चेली में घटित हुआ था, जहां एक निजी स्कूल की बस के खाई में गिरने से 26 बच्चों समेत कुल 30 लोगों की मौत हो गई थी। अधिकतर बच्चे नर्सरी में पढ़ने वाले थे। इस हादसे में मरने वालों में बस का चालक ,एक शिक्षक व एक युवती शामिल थी। एक तेज रफ्तार मोटर साईकल सवार को बचाने के चलते यह हादसा हुआ था।
हादसा इतना भंयकर था कि 24 बच्चों ने घटनास्थल पर ही दम तोड दिया था। यह दर्दनाक हादसा सुबह छह बजे के करीब हुआ। यात्रियों ने सपने में भी नहीं सोचा था कि यह उनका आखिरी सफर होगा। लापरवाही के कारण हजारों सड़क हादसे हो रहे हैं। सडक हादसे अभिशाप बनते जा रहे हैं। पिछले दिनों पंजाब में एक जीप व ट्रक की आपसी टक्कर में दर्जनों स्कूली अध्याापक बेमौत मारे गए थे।