सूत्रों ने बताया कि राज्य सरकार के पास भी इसके इनपुट हैं कि जमात प्रतिबंध के बाद भी अपनी शैक्षिक संस्थाओं के माध्यम से देशविरोधी गतिविधियां जारी रखे हुए है। इनमें कई सरकारी कर्मचारी भी शामिल हैं। ऐसे 300 से ज्यादा सरकारी कर्मचारियों की सरकार ने सूची भी तैयार की है जिन पर बर्खास्तगी की तलवार लटकी हुई है। पहले ही सरकार ने हिजबुल सरगना सैयद सलाहुद्दीन के दो बेटों समेत लगभग दो दर्जन कर्मचारियों को आतंकियों व अलगाववादियों से सांठगांठ के आरोप में बर्खास्त कर दिया है। राज्य सरकार के पास पुख्ता इनपुट हैं कि पूर्ववर्ती सरकारों ने जमात को शिक्षण संस्थान चलाने के लिए जमीन नियमों के विरुद्ध जाकर आवंटित की है। इसकी भी जांच चल रही है।
तीन बार लग चुका है प्रतिबंध
जम्मू-कश्मीर में जमात पर तीन बार प्रतिबंध लग चुका है। पहली बार 1975 में दो साल के लिए, 1990 में तीन साल के लिए (1990-93 तक) पाबंदी लगाई गई। तीसरी बार फरवरी 2019 में पुलवामा हमले के बाद मार्च में पांच साल के लिए प्रतिबंध लगाया गया। घाटी में जमात के सभी कार्यालयों को बंद कराया गया। इनके नेताओं की धरपकड़ भी की गई।
हिजबुल और हुर्रियत को पैदा किया
जमात पर घाटी में हिजबुल मुजाहिदीन को खड़ा करने का आरोप है। बताया जाता है कि हिजबुल सरगना सैयद सलाहुद्दीन को जमात ने ही तैयार किया। संगठन के आतंकियों को फंड से लेकर हथियार और अन्य प्रकार की सुविधाएं जमात से ही मिलती थीं। जमात पर आतंकियों के प्रशिक्षण की व्यवस्था करने के भी आरोप हैं। पाकिस्तान परस्त हुर्रियत को खड़ा करने में जमात का ही हाथ बताया जाता है। जमात ने पाकिस्तान के समर्थन से हुर्रियत को खड़ा किया ताकि घाटी में लगातार पाकिस्तान के समर्थन में आवाज उठती रहे।