एक अनुमान के अनुसार प्रत्येक दिन हजारों रुपये का आभूषण श्रद्धालु समर्पित करते हैं। साल भर में करोड़ों के आभूषण मंदिर में मां के नाम पर चढ़ाए जाते हैं।चढ़ाए जाने वाले आभूषण पर शासन, प्रशासन का कोई अधिकार नहीं होता है। यहां तक कि उनको जानकारी तक नहीं दी जाती है। सारा आभूषण व पैसा पारीवाल, तीर्थपुरोहितों का हो जाता है। जानकारी के बावजूद सरकार इस बारे में जानकारी हासिल करने का प्रयास नहीं करती। भक्त तमाम तरह के टैक्स इत्यादि से बचने के लिए अपने नाम छिपा कर रखता है पर वहीं प्रशासनिक अधिकारी जानकारी होने के बावजूद भी आंख मूंदे रहते हैं।