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आंचल ठाकुर को मिला हिमाचल गौरव पुरस्कार, इस जिले को सिविल सर्विस अवार्ड

Mon, 16 Apr 2018 09:59 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, शिमला
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राज्य स्तरीय हिमाचल दिवस पर मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने जिला प्रशासन कुल्लू को सिविल सर्विस अवार्ड दिया। कुल्लू जिला की आंचल ठाकुर को हिमाचल गौरव पुरस्कार देकर नवाजा गया।

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प्रेरणा स्रोत का सम्मान नीति आयोग के सदस्य प्रो. विनोद के पाल, डॉ. रणदीप गुलेरिया निदेशक एम्स, पुरातात्विक उत्खनन शोधकर्ता डॉ. ओम चंद हांडा और चिन्मय ग्रामीण विकास संगठन धर्मशाला को दिया गया।

सिविल सर्विस अवार्ड- जिला प्रशासन कुल्लू को वर्ष 2017 में पर्यटकों की सुविधा के लिए ‘गो कुल्लू’ परियोजना के तहत ‘gokullu.com’ वेबसाइट तैयार की गई। इस परियोजना की विशेषता यह है कि यदि कोई ट्रैकर दूर-दराज क्षेत्रों में खो जाए या किसी भी विपरीत परिस्थिति में फंस जाए, तो जिओ ट्रैकिंग की मदद से उसे खोजा जा सकता है।
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हिमाचल गौरव पुरस्कार- कुल्लू जिला के मनाली के बुरूआ गांव में पैदा हुई आंचल ठाकुर ने वर्ष 2017 में तुर्की में आयोजित अंतर्राष्ट्रीय स्कीइंग प्रतिस्पर्धा में भारत का प्रतिनिधित्व करते हुए कांस्य पदक हासिल किया।

आंचल ठाकुर स्कीइंग प्रतिस्पर्धा में अंतरराष्ट्रीय पदक जीतने वाली देश की प्रथम खिलाड़ी हैं। वर्तमान में कोरिया के प्यांग चांग में आयोजित होने वाली शीतकालीन ओलंपिक प्रतिस्पर्धा की तैयारी के लिए यूरोप में प्रशिक्षण प्राप्त कर रही हैं।

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इन्हें मिला प्रेरणा स्रोत सम्मान

जिला कांगड़ा के प्रो. विनोद के पॉल भारत के नीति आयोग के सदस्य हैं। प्रो. पॉल स्वास्थ्य एवं शिशु स्वास्थ्य कार्यक्रम के सह-अध्यक्ष व संयुक्त राष्ट्र संघ की ओर से जच्चा-बच्चा स्वास्थ्य पर चलाए जा रहे सहस्त्राब्दी प्रोजेक्ट के विशेष कार्यबल के सदस्य के अलावा देशव्यापी, मिड-डे-मील के लिए नई पोषण दिशा-निर्देश समिति के अध्यक्ष हैं।

जिला कांगड़ा के डॉ. रणदीप गुलेरिया को अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान नई दिल्ली में भारत के प्रथम पलमोनरी मेडिसन एवं निद्रा विकार विभाग को स्थापित करने का श्रेय जाता है।

विश्व स्वास्थ्य संगठन की ओर से रोग प्रतिरोधक एवं इन्फ्लुएंजा की रोकथाम पर चलाए जा रहे कार्यक्रम के विशेषज्ञ वैज्ञानिक सलाहकार संगठन के सदस्य के अलावा भारतीय चिकित्सा संघ, भारतीय श्वसन एवं राष्ट्रीय श्वसन चिकित्सा कॉलेज के जीवन पर्यंत सदस्य भी हैं।

मंडी जिला के डॉ. ओम चंद हांडा ने अपना पूरा जीवन इतिहास, कला और संस्कृति से संबद्ध छानबीन, खोज, शोध एवं लेखन में व्यतीत किया।

तीन दर्जन शोधपूर्ण पुस्तकों के रचयिता डॉ. ओम चंद हांडा वर्ष 1990 से 1992 और वर्ष 2002 से 2004 तक इंडियन काउंसिल ऑफ  हिस्टोरिकल रिसर्च के फैलो और अन्य पदों पर हैं। इनका संजौली में स्थापित स्टडी सेंटर शोधार्थियों के लिए महत्वपूर्ण केंद्र बन चुका है।

33 वर्षों से ग्रामीण विकास क्षेत्र में कार्यरत धर्मशाला सिद्धबाड़ी की चिन्मय ग्रामीण विकास संगठन का कार्य क्षेत्र देश के लगभग 1000 गांवों में फैला हुआ है, इसमें कांगड़ा और चंबा जिला के 700 गांव सहित उड़ीसा, तमिलनाडु, पंजाब, उत्तराखंड और आंध्रप्रदेश के 300 गांव शामिल हैं। संस्था ने विस्तृत बहुमुखी विकास का पंचायत स्तरीय मॉडल तैयार कर इसे कार्यान्वित किया।
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