जिला कांगड़ा के प्रो. विनोद के पॉल भारत के नीति आयोग के सदस्य हैं। प्रो. पॉल स्वास्थ्य एवं शिशु स्वास्थ्य कार्यक्रम के सह-अध्यक्ष व संयुक्त राष्ट्र संघ की ओर से जच्चा-बच्चा स्वास्थ्य पर चलाए जा रहे सहस्त्राब्दी प्रोजेक्ट के विशेष कार्यबल के सदस्य के अलावा देशव्यापी, मिड-डे-मील के लिए नई पोषण दिशा-निर्देश समिति के अध्यक्ष हैं।
जिला कांगड़ा के डॉ. रणदीप गुलेरिया को अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान नई दिल्ली में भारत के प्रथम पलमोनरी मेडिसन एवं निद्रा विकार विभाग को स्थापित करने का श्रेय जाता है।
विश्व स्वास्थ्य संगठन की ओर से रोग प्रतिरोधक एवं इन्फ्लुएंजा की रोकथाम पर चलाए जा रहे कार्यक्रम के विशेषज्ञ वैज्ञानिक सलाहकार संगठन के सदस्य के अलावा भारतीय चिकित्सा संघ, भारतीय श्वसन एवं राष्ट्रीय श्वसन चिकित्सा कॉलेज के जीवन पर्यंत सदस्य भी हैं।
मंडी जिला के डॉ. ओम चंद हांडा ने अपना पूरा जीवन इतिहास, कला और संस्कृति से संबद्ध छानबीन, खोज, शोध एवं लेखन में व्यतीत किया।
तीन दर्जन शोधपूर्ण पुस्तकों के रचयिता डॉ. ओम चंद हांडा वर्ष 1990 से 1992 और वर्ष 2002 से 2004 तक इंडियन काउंसिल ऑफ हिस्टोरिकल रिसर्च के फैलो और अन्य पदों पर हैं। इनका संजौली में स्थापित स्टडी सेंटर शोधार्थियों के लिए महत्वपूर्ण केंद्र बन चुका है।
33 वर्षों से ग्रामीण विकास क्षेत्र में कार्यरत धर्मशाला सिद्धबाड़ी की चिन्मय ग्रामीण विकास संगठन का कार्य क्षेत्र देश के लगभग 1000 गांवों में फैला हुआ है, इसमें कांगड़ा और चंबा जिला के 700 गांव सहित उड़ीसा, तमिलनाडु, पंजाब, उत्तराखंड और आंध्रप्रदेश के 300 गांव शामिल हैं। संस्था ने विस्तृत बहुमुखी विकास का पंचायत स्तरीय मॉडल तैयार कर इसे कार्यान्वित किया।