पंजाब के किसान अब दशहरे पर जगह-जगह पराली के रावण जलाएंगे। भारतीय किसान यूनियन (राजेवाल) ने इस संबंध में एलान किया है। जिससे सरकार और किसानों के बीच टकराव और बढ़ सकता है। भाकियू के प्रदेश महासचिव ओंकार सिंह अगोल ने कहा कि बेमौसम बरसात के कारण धान की फसल को काफी नुकसान पहुंचा है। धान का उत्पादन 5-7 क्विंटल प्रति एकड़ घट गया है।
बहुत जगह धान को तेले की बीमारी लग गई है, जिस कारण उत्पादन 10-12 क्विंटल प्रति एकड़ गिर गया है। इस बार धान का 200 लाख क्विंटल का लक्ष्य पूरा नहीं होगा, कम से कम तीस लाख टन की कमी आएगी। पर सरकार और खेती माहिर इसकी बात नहीं कर रहे। उल्टे सत्ता के दम पर किसानों को पराली न जलाने को कहा जा रहा है। जिस पर 5-7 हजार रुपये प्रति एकड़ अतिरिक्त खर्च आएगा।
अगोल ने कहा कि हर साल की तरह इस बार भी बड़ी संख्या में रावण जलाए जाएंगे, जिनसे प्रदूषण होगा, पर उसे रोकने की हिम्मत किसी में नहीं है। लेकिन किसानों को पराली जलाने पर जुर्माने और परचे किए जा रहे हैं। झूठे वादे कर किसानों के वोट लेकर सत्ता में आई कांग्रेस उन्हीं पर जुल्म ढा रही है। अगोल ने किसानों का आह्वान किया कि 19 अक्तूबर को दशहरे पर खेतों में इकट्ठे होकर पराली के रावण के पुतले बना कर जलाएं। उन्होंने सरकार से मांग की कि किसानों को नुकसान के बदले पांच सौ रुपये प्रति क्विंटल मुआवजा और पराली न जलाने के लिए दो सौ रुपये प्रति क्विंटल दिए जाएं।