दवा, खाने का तेल, इलेक्ट्रिकल, फर्नीचर आदि ई डिक्लेरेशन की अनिवार्यता वाले उत्पादों से जुड़े सूबे के हजारों कारोबारियों पर आबकारी एवं कराधान विभाग ने नई शर्त थोप दी है।
अब एक ही गाड़ी में एक सेलर द्वारा विभिन्न फर्मों को बेचे गए माल (कीमत 30 हजार से अधिक होने की स्थिति में) सभी डीलरों का अलग-अलग से वैट 26 फार्म का ऑनलाइन फार्म भरना होगा।
इससे पहले ऐसा नहीं था, जिस फर्म का माल 30 हजार से अधिक होता था उसे ही ऑनलाइन डिक्लेरेशन होता था। तय कीमत से कम सामान की ई डिक्लरेशन नहीं होती थी।
प्रदेश के भीतर ट्रकों या अन्य माध्यमों से उत्पाद पहुंचाने के लिए जरूरी ऑनलाइन वैट 26 फार्म की प्रक्रिया में यह फेरबदल पहली अप्रैल से लागू हो गया है। इसके तहत अब प्रदेश के भीतर अगर एक ही गाड़ी में एक सेलर का विभिन्न खरीदारों को माल भेजना है, तो उसेे इस शर्त का अनुपालन करना होगा।
28 मार्च को विभाग ने यह अधिसूचना जारी कर दी है। नियमों की अवहेलना पर ऐसे कारोबारियों पर कुल उत्पाद की कीमत का 25 फीसदी जुर्माना होगा। यह महज उन्हीं उत्पादों पर लागू होगा, जिनकी सरकार ने ई डिक्लरेशन को अनिवार्य किया गया है। उधर एईटीसी सोलन रवि सूद ने कहा कि इसकी सूचना विभाग को मिल चुकी है।
ये आएंगे दायरे में
लोहा और स्टील के डीलर/ उत्पादक
प्लाईवुड और सनमाइका
दवाओं के डीलर व उत्पादक
इलेक्ट्रिकल उत्पादों से जुड़े कारोबारी
मार्बल का कारोबार करने वाले
एडिबल आयल
सेल आफ फर्नीचर
सेल आफ तिंबर
अब शराब के लिए नहीं चलेगा पास या परमिट- ई डिक्लरेशन (ऑनलाइन वैट 26 फार्म) के दायरे में अब शराब के थोक और परचून विक्रेता भी आ गए हैं। अब तीस हजार से अधिक शराब या बीयर के लिए ठेकेदारों या विभाग का परमिट या पास नहीं चलेगा। शराब के कारोबारी को ऐसी स्थिति में ऑनलाइन ई डिक्लरेशन भरनी होगी।
उसी के बाद शराब या बीयर को प्रदेश में एक से दूसरी जगह ले जाया जा सकेगा। बिना ई डिक्लरेशन के उत्पाद अवैध होगा और उस पर तय नियमों के तहत 25 फीसदी कर और जुर्माना लगाया जाएगा। तर्क दिया जा रहा है कि इस प्रक्रिया से अवैध शराब के कारोबार पर शिकंजा कसा जा सकेगा।
कई उत्पादक, थोक रिटेलर एक परमिट या पास के बूते कई चक्कर काटकर शराब इधर-उधर करते थे। ई डिक्लेरेशन के दायरे में पहले 8 उत्पादों के डीलर आते थे, लेकिन पहली अप्रैल से इसमें शराब और बीयर के कारोबारी भी जोड़ दिए गए हैं।
ये है 26 नंबर फार्म- 26 नंबर फार्म में खरीदारी और विक्रेता की पूरी डिटेल इंगित होती है। सामान क्या है, कितनी मात्रा है और कितनी कीमत है, इसका सारा ब्योरा रहता है। इसे विभाग के वेब पोर्टल पर भरा जाता है। विभाग के पास पूरी डिटेल आती है। चेकिंग की स्थिति में टिन (टैक्स आइडेंटिफिकेशन) के माध्यम से ई डिक्लेरेशन का पता लगाया जाता है।