टोक्यो पैरालिंपिक में योगेश से परिजनों को पदक लाने की उम्मीद थी। जन्माष्टमी के दिन सुबह जब उनके इवेंट्स हुए तो दादा सूबेदार हुकमचंद, दादी सावित्री देवी, पिता ऑनरेरी कैप्टन ज्ञानचंद, चाचा प्रेमचंद, कर्मबीर, संदीप, संजीव, अमित, सुमित, बड़ी बहन पूजा, फूफा सुभाष व नरेश के अलावा आसपास के लोग टीवी के आगे मैच देखने बैठ गए थे।
पिता ज्ञानचंद व मां मीना देवी ने बताया कि 24 अगस्त को जब योगेश को टोक्यो पैरालंपिक में हिस्सा लेने के लिए वे एयरपोर्ट पर छोड़ने गए तो उसने एक ही वादा किया था कि वह देश के लिए मेडल लेकर ही लौटेगा। अपने गांव मांडोठी का नाम देश-दुनिया में चमकाएगा। योगेश ने जन्माष्टमी के दिन देशवासियों को बड़ी खुशी दी और तिरंगा का भी मान खूब बढ़ाया।
ये हैं उपलब्धियां
- वर्ष 2018 में पंचकूला में हुई राष्ट्रीय प्रतियोगिता में डिस्कस थ्रो में स्वर्ण पदक जीता
- 2018 में बर्लिन में हुई ओपन ग्रेंडप्रिक्स में डिस्कस थ्रो में स्वर्ण पदक जीता
- 2018 में इंडोनेशिया में हुए एशियन पैरा गेम्स में चौथा स्थान पाया
- 2019 में फरीदाबाद में हुई राज्य स्तरीय प्रतियोगिता में स्वर्ण पदक जीता
- 2019 में पेरिस में हुई ओपन ग्रेंडप्रिक्स डिस्कस थ्रो में स्वर्ण पदक जीता
- 2019 में दुबई में हुई वर्ल्ड चैंपियनशिप में कांस्य पदक जीता
- 2021 में बंगलूरू में हुई राष्ट्रीय प्रतियोगिता के डिस्कस थ्रो में स्वर्ण पदक हासिल किया