पहले दिन मरीजों की संख्या भी पीजीआई में कम रही। कारण था भारत बंद का असर । इससे एक बात यह भी रही कि ओपीडी में धक्का-मुक्की और अव्यवस्था नहीं हुई। सुबह सवा नौ बजे पंजीकरण शुरू किया गया। जो दो घंटे तक तक चला। इस दौरान सभी मरीजों का पंजीकरण शांतिपूर्ण ढंग से हुआ।
पीजीआई में सोमवार को डेढ़ साल बाद मरीजों को कोरोना से पहले की व्यवस्था के तहत इलाज मिला। न्यू ओपीडी में मरीजों का सीधे पंजीकरण किया गया। जिसके बाद डॉक्टरों ने मरीजों को देखा। इस दौरान उन्हें ओपीडी के गेट पर ही सेनिटाइजर और मास्क भी दिया गया।
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पहले दिन की व्यवस्था संभालने में सुरक्षा गार्डों की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण रही। उन्होंने मरीजों को कोरोना से बचाव संबंधी मानकों के अनुसार ओपीडी में भेजा। वहीं, जिन मरीजों को पंजीकरण कराने या संबंधित डॉक्टर की ओपीडी तलाशने में परेशानी हो रही थी, उनकी भी मदद की। हालांकि पहले दिन की ओपीडी पर भारत बंद का असर साफ दिखा। सामान्य दिनों की तुलना में बहुत कम मरीज ही इलाज कराने पहुंचे। जिससे ओपीडी में धक्का-मुक्की और अव्यवस्था जैसी स्थिति नहीं हुई। सुबह सवा नौ बजे पंजीकरण शुरू किया गया। जो 11 बजे तक चला। इस दौरान सभी मरीजों का पंजीकरण शांतिपूर्ण ढंग से हुआ।
प्रशासनिक अधिकारियों ने जांची व्यवस्था
इस दौरान पीजीआई के प्रशासनिक अधिकारियों ने ओपीडी का दौरा कर व्यवस्था जांची। डीडीए कुमार गौरव ने न्यू ओपीडी के पंजीकरण काउंटर के साथ ही ओपीडी के अलग-अलग कमरों में जाकर मरीजों से परेशानी पूछी। इस दौरान मरीज और तीमारदार व्यवस्था से संतुष्ट नजर आए। ओपीडी में दिखाने का आलम यह था कि कुछ मरीजों ने एक दिन पहले आकर अस्पताल की पार्किंग में रविवार की रात गुजारी। गुरदासपुर से इलाज कराने आए सुरिंदर सिंह व लुधियाना के मनदीप कुमार का कहना है कि कोरोना के कारण सबसे ज्यादा नुकसान नॉन कोविड मरीजों को हुआ है। अब प्रशासन को ऐसी व्यवस्था करनी चाहिए कि ओपीडी बंद करने की नौबत न आए।
पीजीआई की ओपीडी को लेकर निदेशक प्रो. जगतराम का कहना है कि दो हफ्ते तक व्यवस्था ट्रायल के तौर पर चलेगी। अगर इस दौरान संक्रमण दर नियंत्रित रही तो इसे नियमित करने का निर्णय लिया जाएगा। टेलीकंसलटेशन व ऑनलाइन पंजीकरण की सुविधा जारी रहेगी। इसके लिए उन्होंने मरीजों व उनके परिजनों से संक्रमण से बचाव के मानकों का पालन करने की अपील की। उन्होंने कहा कि अभी कोरोना गया नहीं है। इससे बचाव जरूरी है।