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ट्रांसजेंडर की याचिका: पहले मेल था, जवान हुआ तो खुद को फीमेल पाया, सर्टिफिकेट में जेंडर बदलने के लिए HC पहुंचा

Fri, 20 Sep 2024 10:12 PM IST
अंकेश ठाकुर न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़

सार

एक ट्रांसजेडर ने पंजाब हरियाणा हाई कोर्ट में याचिका दाखिल की है। जिसमें उन्होंने अपने प्रमाण पत्रों में जेंडर (लिंग) बदलने की मांग को लेकर एजुकेशन बोर्ड को निर्देश जारी करने की मांग की है।
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पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट में एक ट्रांसजेंडर ने याचिका दायर की है। याचिका में उन्होंने ट्रांसजेंडर (अधिकारों का संरक्षण) अधिनियम 2019 और नियम 2020 के प्रावधानों के तहत ट्रांसजेंडर के लिए पंजाब बोर्ड परीक्षा के प्रमाणपत्र में लिंग बदलने की नीति बनाने की मांग की है। इस याचिका पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने पंजाब सरकार और पंजाब स्कूल एजुकेशन बोर्ड (पीएसईबी) को नोटिस जारी किया है। 
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जस्टिस जस गुरप्रीत सिंह पुरी ने पंजाब स्कूल शिक्षा बोर्ड के सचिव, पंजाब के सामाजिक सुरक्षा विभाग के सचिव, भारत संघ और उन स्कूलों के अधिकारियों सहित अन्य अधिकारियों को प्रतिवादी बनाया है। याचिका एक ट्रांसजेंडर (महिला) की तरफ से दायर की गई थी, जिसे जन्म के समय पुरुष लिंग दिया गया था और इसलिए स्कूल बोर्ड प्रमाणपत्रों में उसका लिंग पुरुष लिखा गया था।

याची का कहना था कि बड़े होने के दौरान उसने खुद को एक ट्रांसजेंडर महिला के रूप में पहचाना। वर्ष 2022 में जालंधर जिला मजिस्ट्रेट से ट्रांसजेंडर पहचान प्रमाण पत्र और पहचान पत्र प्राप्त किया।
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उसने 5वीं, 8वीं, 10वीं और 12वीं कक्षा के प्रमाणपत्रों में अपना लिंग बदलने के लिए पंजाब स्कूल शिक्षा बोर्ड में आवेदन किया था, लेकिन उसे अखबार में प्रकाशित करने और एक हलफनामा दाखिल करने के लिए कहा गया। अखबारों में इसे प्रकाशित करने के बाद उसने नगर निगम जालंधर में संपर्क किया। लेकिन, अधिकारियों ने ट्रांसजेंडर प्रमाणपत्र के आधार पर लिंग बदलने में असमर्थता जताई।

याची के वकील मनिंदरजीत सिंह ने कोर्ट को बताया कि याची से पंजाब स्कूल शिक्षा बोर्ड के अधिकारियों ने दस्तावेजों की एक सूची मांगी थी, लेकिन उसका ट्रांसजेंडर प्रमाणपत्र सूची में नहीं था और अधिकारियों द्वारा उसे कथित तौर पर अपमानित किया गया। इतना ही नहीं उसका मजाक भी उड़ाया गया।

याचिका में बोर्ड के उन निर्देशों को रद्द करने की मांग की गई है, जिसमें सर्वोच्च न्यायालय ने स्वयं की पहचान और लिंग तय करने का अधिकार और ट्रांसजेंडर व्यक्तियों (अधिकारों का संरक्षण) अधिनियम की धारा 7 (3) को मान्यता दी है।

याची ने पंजाब स्कूल शिक्षा बोर्ड को ट्रांसजेंडर के प्रति अपने अधिकारियों को संवेदनशील बनाने और ट्रांसजेंडर (अधिकारों का संरक्षण) अधिनियम, 2019 की धारा 8 के अनुपालन में उनके खिलाफ भेदभाव नहीं करने के निर्देश देने की भी प्रार्थना की गई। मामले में आगामी सुनवाई एक जनवरी, 2025 को होगी।
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