पंजाब के मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी।
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पंजाब सरकार ने उन सभी अधिकारियों और कर्मचारियों की सेवाएं तुरंत प्रभाव से समाप्त करने का आदेश जारी किया है, जिन्हें रिटायरमेंट के बाद फिर से नियुक्त किया गया था। यह नियुक्तियां कॉन्ट्रैक्ट या किसी अन्य अस्थाई आधार पर की गई थीं।
राज्य सरकार के कार्मिक विभाग ने सभी वित्त आयुक्त, प्रमुख सचिव और प्रबंधकीय सचिवों को आदेश जारी किया है कि रिटायरमेंट के बाद सरकार या संबंधित विभाग की ओर से अपने स्तर पर दोबारा नियुक्त कर्मचारियों व अधिकारियों की सेवाएं तुरंत प्रभाव से समाप्त कर दी गई हैं। यह फैसला रिटायरमेंट के बाद नियुक्त विधि अधिकारियों पर लागू नहीं होगा।
अब तक बहाल थी कैप्टन सरकार की व्यवस्था
2017 में कैप्टन अमरिंदर सिंह सरकार के गठन के बाद से राज्य सरकार के शीर्ष पदों पर रिटायर्ड अफसरों की नियुक्तियों के साथ ही विभागों में रिटायर होने वाले कर्मचारियों के कार्यकाल को दो साल बढ़ा दिया गया था। इसी व्यवस्था को अब तक बहाल रखा गया।
कैप्टन सरकार का तर्क था कि सरकारी खजाना खाली होने के कारण रिटायर हो रहे मुलाजिमों और अफसरों को एकमुश्त वित्तीय लाभ देने के लिए पर्याप्त पैसा नहीं है। इसी आधार पर राज्य सरकार ने रिटायर्ड हुए मुलाजिमों और अफसरों को कांट्रैक्ट या अन्य अस्थायी व्यवस्था के तहत दोबारा नौकरी पर बनाए रखा। इस अवधि के दौरान सरकार इन मुलाजिमों और अफसरों को केवल वेतन देती रही, जबकि नियमित कर्मियों वाले अन्य लाभ नहीं दिए जाते थे।