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राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के 36 संगठनों के विस्तार की योजना तैयार, रामलाल को सौंपी गई जिम्मेदारी

Thu, 18 Jul 2019 12:50 PM IST
खुशबू गोयल सुरिंदर पाल, अमर उजाला, जालंधर(पंजाब)
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फाइल फोटो
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राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ ने 2006 में रामलाल को एक काम सौंपकर भाजपा में भेजा था और दूसरी बार सरकार का गठन करने के बाद रामलाल वापस आरएसएस भेज दिया गया है। आरएसएस ने भी रामलाल को वापस बुलाकर अखिल भारतीय सह संपर्क प्रमुख बनाया है। राजनीतिक गलियारे में रामलाल का कद घटने की चर्चा जरूर है, पर बीजेपी और आरएसएस से जुड़े सूत्र ऐसा नहीं मानते हैं।
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उनका तर्क है कि अब आरएसएस अपना प्रसार तेजी से करेगी, खासकर उन प्रदेशों में जहां पर आरएसएस की जड़ें गहरी नहीं हैं। इनमें पंजाब भी आता है। रामलाल को आरएसएस में सह संपर्क प्रमुख बनाए जाने के बाद आरएसएस के 36 संगठनों का विस्तार तय है। विस्तार खासकर उन राज्यों में अधिक होगा, जहां आरएसएस ग्रामीण इलाकों तक नहीं पहुंच पाई है। टारगेट मुख्यतः पंजाब रहेगा, जहां पर बिग्रेडियर गगनेजा की हत्या के बाद प्रसार बिलकुल रुक गया है।

आरएसएस के वरिष्ठ राष्ट्रीय रणनीतिकारों का मानना है कि हालिया वर्षों में संघ परिवार में शामिल सहयोगी संगठनों में सबसे ज्यादा विस्तार इसकी राजनीतिक शाखा बीजेपी का हुआ है। संघ के अन्य 36 अनुषांगिक संगठन विस्तार और मजबूती के मामले में बीजेपी के मुकाबले काफी पीछे चल रहे हैं। ऐसे में संघ अब उन संगठनों को भी बीजेपी के समानांतर लाने की कोशिश में है।
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सूत्रों के मुताबिक, कहा गया है कि आरएसएस में ही पूरी जिंदगी बिता देने वाला कोई प्रचारक उतने अच्छे से यह काम नहीं कर सकता, जितना बीजेपी में रहकर बड़े-बड़े संपर्क रखने वाला प्रचारक करता है। क्योंकि संघ के सेवा भारती, स्वदेशी जागरण मंच सहित अन्य सभी संगठनों के कार्यों के लिए जरूरी संसाधन और फंड भी चाहिए। इस पैमाने पर आरएसएस की नजर में रामलाल ही फिट बैठते हैं।

रामलाल की बीजेपी के केंद्रीय मंत्रियों, मुख्यमंत्रियों से लेकर ब्यूरोक्रेसी और व्यापार आदि क्षेत्रों के प्रमुख व्यक्तियों से अच्छे संपर्क बने हैं। रामलाल ने ही पंजाब में आप सांसद हरिंदर सिंह खालसा को भाजपा ज्वॉइन कराई थी और अब निश्चित तौर पर उनका टारगेट पंजाब में सिखों को आरएसएस के जोड़कर ग्रामीण इलाकों में शाखाओं के प्रसार पर है।

पंजाब में इस समय 800 के करीब शाखाएं लग रही हैं, यह अधिकतर शहरी इलाकों में हैं। संघ के तमाम फ्रंटल संगठन अधिक सक्रिय नहीं हैं। पंजाब में शाखाओं का विस्तार शुरू हुआ था, लेकिन हिंदू नेताओं की एक के बाद हत्या के बाद इस प्रसार पर ब्रेक लग गया। रामलाल का पंजाब से गहरा लगाव है।

आरएसएस उनके संपर्क व तजुर्बे का पूरी तरह से फायदा उठाने की तैयारी में है। वहीं उन पर पंजाब में भी आरएसएस के ग्रामीण स्तर तक प्रसार की जिम्मेदारी है। इस पर अभी से मंथन शुरू हो चुका है और पंजाब में आरएसएस पूरी तरह से उत्साहित है।
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