टाइम मैगजीन की ओर से ‘पर्यावरण के हीरो’ के टाइटिल से नवाजे गए संत बलबीर सिंह सीचेवाल के अनोखे ‘सीचेवाल मॉडल’ के सहारे ही केंद्र सरकार की बहुप्रतीक्षित नमामि गंगे योजना सिरे चढ़ेगी।
योजना के तहत गंगा की सफाई के लिए केंद्र सरकार को संत सीचेवाल का तरीका ही रास आया है। यही वजह है कि गंगा को साफ करने का अभियान इसी मॉडल को अपनाते हुए शुरू किया गया है। केंद्र सरकार ने पांच राज्यों में इस मॉडल के जरिए जल संरक्षण की योजना शुरू कर दी है।
काली बेईं नदी को प्रदूषण मुक्त करने वाले संत सीचेवाल की तकनीक अपनाने के लिए उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड और पश्चिम बंगाल से गंगा किनारे वाले गांव के लोग सुल्तानपुर लोधी (कपूरथला) पहुंच रहे हैं। संत सीचेवाल का कहना है कि इस तकनीक से न्यूनतम राशि पर गंगा की सफाई की जा सकेगी। पहले चरण में पांच राज्यों के 1657 गांवों में यह अभियान चलाया जाना है। इसमें से दो सौ गांवों में अभियान शुरू हो चुका है।
पंजाब सरकार से नाखुश हैं संत
सीचेवाल ने बताया कि केंद्र सरकार की तरफ से उनके मॉडल को तरजीह दिए जाने के बावजूद पंजाब सरकार ने इसकी उपेक्षा की है। राज्य सरकार की ओर से इसे तवज्जो न मिलने के कारण सीचेवाल नाखुश हैं। उनका कहना है कि पंजाब सरकार पानी सफाई के लिए बड़े-बड़े प्लांट पर करोड़ों खर्च तो कर रही है, लेकिन उसे जारी रखने के लिए पर्याप्त फंड न होने के कारण योजना नाकाम हो रही हैं।
पंजाब में 12,500 गांवों में से प्रत्येक में दो से तीन छप्पर (तालाब) हैं। उसका पानी दूषित और गंदा हैं, लेकिन वह सिंचाई के लिए उपयुक्त हैं। यदि उसका सही तरीके से ट्रीटमेंट किया जाए, तो इससे वाटर रिचार्ज भी होगा और भूजल का दोहन कम होगा। उन्होंने पंजाब सरकार को कई बार सुझाव दिया कि है वाटर ट्रीटमेंट प्लांट लगाए जाए। वहीं, दरिया के साथ लगने वाले गांवों में सीचेवाल मॉडल का उपयोग किया जाए, लेकिन अभी तक ऐसा नहीं हुआ।