सुरजेवाला ने सवाल किया कि हरियाणा सरकार अडाणी से सस्ती के बजाय दो गुना रेट पर बिजली क्यों खरीद रही है। प्रेसवार्ता में सुरजेवाला ने कहा कि प्रदेश में बिजली-पानी को लेकर हाहाकार मची है। गांव हो या शहर-12 से 20 घंटे तक के बिजली कट लग रहे हैं। उद्योग बंद कर दिए गए हैं। एक तरफ गर्मी ने सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं तो दूसरी तरफ सरकार ने मिलीभगत व सांठगांठ से हरियाणा वासियों के अधिकारों पर डाका डाला है।
सुरजेवाला ने कहा कि सात अगस्त, 2008 को हरियाणा की बिजली कंपनियों ने अडाणी पावर से 25 साल के लिए 2.94 रुपये में 1424 मेगावाट बिजली खरीद का समझौता किया। इसके तहत अडानी पावर के मुंद्रा, गुजरात स्थित बिजलीघर से महेंद्रगढ़ हरियाणा तक बिजली की लाइन बिछाई गई। साल 2021 से सुप्रीम कोर्ट में केस हारने के बावजूद अडाणी पावर ने इंडोनेशिया के कोयले की बढ़ी हुई कीमतों को कारण बताकर हरियाणा को दी जाने वाली 1424 मेगावाट की सप्लाई रोक रखी है।
सरकार ने अडाणी से बिजली वापस लेने के बजाय तीन साल के लिए एमबी पावर, मध्य प्रदेश व आरकेएम पावर, छत्तीसगढ़ से 5.70 व 5.75 प्रति यूनिट की दर से बिजली खरीदने का निर्णय लिया है। सुरजेवाला ने कहा कि नार्दर्न रीजनल लोड डिस्पैच सेंटर की रिपोर्ट के मुताबिक मुंद्रा (गुजरात), महेंद्रगढ़ (हरियाणा) की बिजली सप्लाई लाइन में 9 अप्रैल से 29 अप्रैल 2022 तक की रिपोर्ट में साफ है कि हर रोज औसतन 114 लाख यूनिट हरियाणा की बिजली गुजरात जा रही है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि अडाणी को दी जा रही बिजली के बदले प्रदेश को राशि भी नहीं मिल रही है।