गौरतलब है कि जब से सुप्रीम कोर्ट ने 'प्रकाश सिंह व अन्य बनाम भारत संघ' केस पर अपने फैसले में यूपीएससी के माध्यम से डीजीपी की नियुक्ति की प्रक्रियाएं निर्धारित कीं, तब से पंजाब सरकार यह मुद्दा उठाती रही है कि 'कानून-व्यवस्था' राज्य का विषय है।
यह होगी चयन प्रक्रिया
संशोधित बिल के अनुसार राज्य सरकार डीजीपी के चयन के लिए इम्पैनलमेंट कमेटी का गठन करेगी। इसमें पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के रिटायर्ड चीफ जस्टिस चेयरमैन होंगे, जबकि राज्य के मुख्य सचिव, यूपीएससी का एक प्रतिनिधि, पंजाब पब्लिक सर्विस कमीशन के चेयरमैन, केंद्रीय गृह मंत्रालय का एक प्रतिनिधि, पंजाब के रिटायर्ड डीजीपी सदस्य के रूप में शामिल होंगे।
पंजाब के गृह मामले एवं न्याय विभाग के प्रशासनिक सचिव सदस्य व कन्वीनर के रूप में शामिल होंगे। यह कमेटी योग्य अधिकारियों के पूल में से तीन सबसे सीनियर अधिकारियों का पैनल चुनेगी, इसके लिए संबंधित अधिकारियों का सेवाकाल, उनका अच्छा रिकॉर्ड और पुलिस बल के नेतृत्व के अनुभव का आकलन किया जाएगा। इस तरह, राज्य सरकार कमेटी द्वारा सुझाए तीन अधिकारियों के पैनल में से किसी एक अधिकारी का डीजीपी पद के लिए चयन करेगी। यह नियुक्ति दो साल के लिए होगी। हालांकि डीजीपी की नियुक्ति की प्रक्रिया पूरी होने तक राज्य सरकार डीजीपी रैंक के किसी भी अधिकारी को डीजीपी पद का अतिरिक्त चार्ज दे सकती है।
गौरतलब है कि पंजाब में इस समय आईपीएस अधिकारी गौरव यादव कार्यकारी डीजीपी के रूप में कार्य कर रहे हैं। इस पद पर नियमित नियुक्ति के लिए यूपीएससी ने राज्य सरकार से कई बार अफसरों का पैनल भेजने को लिखा है लेकिन सरकार ने अब तक पैनल नहीं बनाया है। इस बीच गौरव यादव को कार्यकारी डीजीपी के रूप में काम करते हुए छह माह से ज्यादा समय बीत चुका है और नियमानुसार डीजीपी के पद पर किसी भी अधिकारी की अस्थायी नियुक्ति छह माह के अधिक अवधि के लिए नहीं हो सकती।