पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने हत्या के मामले में उम्रकैद की सजा के खिलाफ अपील को खारिज करते हुए स्पष्ट कर दिया कि उद्देश्य साबित न होने पर भी आरोपी को दोषी करार दिया जा सकता है। यदि परिस्थितियां आरोपी को अपराध के साथ जोड़ती हैं तो ऐसा किया जा सकता है।
याचिका दाखिल करते हुए कुरुक्षेत्र निवासी विनीत ने हाईकोर्ट को बताया कि 2015 में उसे उसकी पत्नी की हत्या का दोषी मानते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई गई थी। शिकायत के अनुसार याची का विवाह 2006 में हुआ था। इसके बाद से ही लगातार वह अपनी पत्नी को दहेज के लिए बार-बार पीटता था। एक दिन अचानक याची की सास को याची ने फोन करके बताया कि उसकी पत्नी की मौत हो गई है। इसके बाद याची की सास की शिकायत के आधार पर पुलिस ने केस दर्ज किया और अदालत ने याची को दोषी मानते हुए उम्रकैद की सजा सुना दी।
याची ने कहा कि इस मामले में न तो उसके पास कत्ल का कोई मकसद था और न ही इस मामले में कोई प्रत्यक्षदर्शी है। ऐसे में उसे दोषी करार देना गलत है। हाईकोर्ट ने याची की दलीलों को खारिज कर दिया। कोर्ट ने कहा कि उद्देश्य साबित नहीं होने की स्थिति में यदि परिस्थितियां आरोपी को अपराध से जोड़ती हैं तो उसे दोषी करार दिया जा सकता है। इन टिप्पणियों के साथ ही हाईकोर्ट ने याची की अपील को सिरे से खारिज कर दिया।