फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

फैसले का विरोध: शिलांग के पंजाबी लेन से सिखों को हटाने के फैसले पर पंजाब सरकार ने जताया विरोध

Mon, 11 Oct 2021 10:36 AM IST
ajay kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़

सार

जून 2019 में रंधावा के नेतृत्व में पंजाब सरकार के प्रतिनिधिमंडल ने शिलांग स्थित श्री गुरु नानक दरबार का भी दौरा किया था, जहां गुरुद्वारा के प्रधान गुरजीत सिंह ने प्रतिनिधिमंडल को बताया था कि उनको वहां से जबरन हटाया जा रहा था।
विज्ञापन
पंजाबी लेन
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

मेघालय की राजधानी शिलांग में सिख लेन से सिखों को हटाए जाने के मेघालय सरकार के फैसले से पंजाब सरकार नाराज है। प्रदेश के उप मुख्यमंत्री सुखजिंदर सिंह रंधावा ने कहा कि केंद्र और मेघालय सरकार को पत्र लिखकर राज्य सरकार फैसले का विरोध करेगी। उन्होंने आरोप लगाया कि मेघालय सरकार भू-माफियाओं के दबाव में सिखों को विस्थापित कर रही है।

विज्ञापन


यह भी पढ़ें- पंजाब में बिजली संकट: पूर्वोत्तर के राज्यों से कोयला आने में लगेंगे पांच दिन, पावरकॉम की लोगों से अपील, कम जलाएं बिजली

डिप्टी सीएम ने बताया कि हाल ही में मेघालय के उपमुख्यमंत्री प्रेस्टन टायन्सॉन्ग के नेतृत्व वाली उच्च स्तरीय समिति की सिफारिशों पर मेघालय कैबिनेट द्वारा थेम ल्यू मालौंग क्षेत्र (पंजाबी लेन) में रहने वाले सिखों को दूसरी जगह बसाने के प्रस्ताव को मंजूरी दी गई है। सुखजिंदर रंधावा ने कहा कि भू-माफिया के दबाव में दशकों से शिलांग में रहने वाले सिखों को विस्थापित करना अन्यायपूर्ण है और पंजाब सरकार इस फैसले का सख्त विरोध करती है। 
विज्ञापन
विज्ञापन


यह भी पढ़ें- सादे अंदाज में शादी: मोहाली में हुआ पंजाब सीएम के बेटे का विवाह, खुद गाड़ी चला कार्यक्रम में पहुंचे चरणजीत सिंह चन्नी

200 साल से अधिक समय से सिख लेन में रह रहे सिख 
उन्होंने बताया कि 200 साल से भी अधिक समय से शिलांग में बसे इन सिखों के अधिकारों की किसी भी कीमत पर उल्लंघन नहीं होने दिया जाएगा। भाजपा गठबंधन वाली मेघालय सरकार यह फैसला तुरंत वापस ले। उन्होंने कहा कि एनडीए सरकार अल्पसंख्यकों को सुरक्षा का माहौल प्रदान करने और उनमें विश्वास पैदा करने में नाकाम रही है। पूरे देश में अल्पसंख्यक वर्ग असुरक्षित महसूस कर रहा है। इसका ताजा उदाहरण जम्मू-कश्मीर और उत्तर प्रदेश में देखने को मिला हैं। यह संविधान की मूल भावना के उलट है जिसमें सबको समान अधिकार मिला है।

और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें