विधानसभा चुनाव 2022 से पहले राजनीतिक दलों का धार्मिक स्थलों पर नतमस्तक होने का सिलसिला शुरू हो चुका है ताकि इन स्थलों से जुड़े वोट बैंक को किसी तरह अपनी तरफ खींचा जा सके। शनिवार को मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी भी जिला लुधियाना में नामधारी संप्रदाय के सबसे बड़े धार्मिक स्थल श्री भैणी साहिब में पहुंचे।
सीएम के इस पूरे दौरे को अनौपचारिक रखा गया। चंद विधायक और सरकारी अफसरों के अलावा किसी को वहां आने की इज्जात नहीं थी। यहां पर सीएम चन्नी कुछ घंटे रुके और नामधारी संप्रदाय के प्रमुख सतगुरु उदय सिंह से मिले। यहां बताते चले कि नामधारी संप्रदाय का एक बहुत बड़ा वोट बैंक है। केवल पंजाब नहीं आसपास के राज्यों में इस संप्रदाय से जुड़े लोग भारी संख्या में रहते हैं।
राजनीतिक गलियारों में सीएम के इस दौरे को राजनीतिक वोट बैंक की नजर से देखा जा रहा है। यह कोई पहली बार नहीं हो रहा है, इससे पहले भी पंजाब चुनाव के दौरान धार्मिक कार्ड सबसे महत्वपूर्ण रहा है। विभिन्न राजनीतिक पार्टी दिग्गज धार्मिक स्थलों के अलावा विभिन्न डेरों के वोट बैंक पाने के लिए एड़ी-चोटी का जोर लगाते रहे हैं।
गौरतलब है कि विधानसभा चुनाव के नजदीक आते ही राजनीतिक दलों के धार्मिक स्थलों के दौरे शुरू हो चुके हैं। इस मामले में अकाली दल सुप्रीमो सुखबीर बादल भी पीछे नहीं रहे हैं। हिमाचल में हिंदुओं का प्रसिद्ध धार्मिक स्थल चिंतपूर्णी दरबार में दर्शन कर चुके हैं। कुछ समय पहले ही वह राजस्थान स्थित सालासर धाम में दर्शन करने के लिए गए थे। इस बार वह मालवा के कुछ नेताओं को साथ लेकर बस से माध्यम से दर्शन करने के निकले थे।
यहां बता दे कि मालवा एरिया में सबसे ज्यादा लोग सालासर धाम के दर्शन के लिए जाते हैं। इसके अलावा लुधियाना में भी सुखबीर बादल ज्यादातर धार्मिक स्थलों पर अपनी हाजिरी लगवा चुके हैं। इस मामले में आम आदमी पार्टी प्रमुख अरविंद केजरीवाल भी पीछे नहीं हैं। वह भी अमृतसर फेरी के दौरान वहां के सभी धार्मिक स्थलों पर नतमस्तक हो चुके हैं। वहीं आने वाले दिनों में यह सिलसिला और तेजा होगा क्योंकि एक राजनीतिक दल के जाने के बाद दूसरा दल वहां जरूर जाता है।