तीनों कृषि कानूनों को वापस लेने का फैसला पीएम मोदी ने चुनावों में मिली करारी हार के कारण मजबूरी में लिया है। यह बात शुक्रवार को सेक्टर- 35 के कांग्रेस भवन में आयोजित प्रेसवार्ता में कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष सुभाष चावला, मुख्य प्रवक्ता एचएस लक्की और गुरबख्श रावत ने कही।
कांग्रेस के नेताओं ने प्रधानमंत्री मोदी द्वारा तीन कृषि कानूनों को वापस लेने की घोषणा को किसानों की जीत और भाजपा के अहंकार और हठधर्मिता की हार करार दिया। उन्होंने कहा कि कहा कि प्रधानमंत्री को किसान आंदोलन के सामने झुकना पड़ा। इस आंदोलन में 750 से अधिक किसानों को अपने प्राणों की आहुति देनी पड़ी थी। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री को प्रत्येक शहीद के लिए एक करोड़ के मुआवजे की घोषणा करनी चाहिए। हर परिवार को एक नौकरी देनी चाहिए। उन्होंने भाजपा नेताओं द्वारा पिछले दिनों किसानों के बारे दिए बयानों की भी निंदा की।
महासचिव और मुख्य प्रवक्ता एच एस लक्की ने कहा कि सरकार को जनता के दबाव में यह निर्णय लेने के लिए मजबूर होना पड़ा। हाल ही में विभिन्न राज्यों में हुए विधानसभा चुनावों में भाजपा को हार का सामना करना पड़ा था। भाजपा ने महसूस किया है कि वह तेजी से जनता का समर्थन खो रही है और लोग उसकी जनविरोधी नीतियों से तंग आ चुके है। ऐसे में यह फैसला मजबूरी में आया है। इससे पहले दिन में कांग्रेस ने दिवंगत प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी का जन्मदिन मनाया और मौलीजागरा में एक समारोह आयोजित किया गया। पार्टी ने गुरु नानक देव जी के जन्मदिन के शुभ अवसर पर शहर के सभी निवासियों को शुभकामनाएं दीं।
किसानों के संघर्ष और लोकतंत्र की जीत
कांग्रेस पहले दिन से ही तीनों कृषि कानूनों के विरोध में रही है। पार्टी ने किसानों का पूरा समर्थन किया है। दबाव में केंद्र सरकार ने कानून वापस लेने की घोषणा की है। प्रधानमंत्री ने गलती को स्वीकार किया है। यह लोकतंत्र विचारधारा की जीत हुई है। किसानों के संघर्ष की जीत है। यह कुछ किसानों नहीं बल्कि बहुत लोगों की मांग थी। सरकार की अहंकार की हार हुई है। -पवन बंसल, पूर्व केंद्रीय मंत्री
एक साल पहले लेना था फैसला
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक साल पहले ही यह फैसला लेना चाहिए था। इससे सैकड़ों किसानों की जान बच सकती थी। दूसरे राज्यों में हार के बाद भाजपा को होश आया है। देश के किसानों की आवाज को सुनें। किसानों की सभी मांगें केंद्र सरकार को मान लेना चाहिए। अब भी यह समझ नहीं आया तो भाजपा के लिए देर हो जाएगी। -हरदीप सिंह, प्रधान शिअद चंडीगढ़
शुभ दिन पर शुभ काम हुआ
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का फैसला बहुत अच्छा है। प्रधानमंत्री ने शुभ दिन पर शुभ फैसला लिया है। किसानों के हित में तीनों कृषि कानून लाए थे। गुरु पर्व के दिन प्रधानमंत्री ने यह बेहतर फैसला लिया है। यह देश और किसानों के हित में होगा। -अरुण सूद, अध्यक्ष, भाजपा चंडीगढ़ प्रदेश
लोकतंत्र में घमंड और अहंकार का कोई स्थान नहीं
प्रजातंत्र में प्रजा सर्वोपरि है। घमंड और अहंकार का कोई स्थान नहीं होता, यह सिद्ध हो गया। मोदी सरकार को आखिरकार झुकना पड़ा। मोदी को किसान आंदोलन में मृतक किसानों को श्रद्धांजलि देनी चाहिए थी। साथ ही पांच करोड़ रुपये मुआवजा भी देने का फैसला करना चाहिए था। लखीमपुर खीरी की घटना पर अपने कैबिनेट मंत्री को बर्खास्त करने की घोषणा करने के साथ आंदोलन को बदनाम करने वाले भाजपा नेताओं की ओर से माफी मांगी जानी चाहिए थी। -प्रदीप छाबड़ा, राष्ट्रीय सह प्रभारी आम अदमी पार्टी
व्यक्तिगत रूप से मोदी की पहली हार
यदि किसानों से बात कर कानून बनाते तो पीएम मोदी को पीछे नहीं हटना पड़ता। देश के किसानों ने केंद्र सरकार को बता दिया है कि लोकतंत्र में राजा व्यक्ति नहीं जनता होती है। पीएम मोदी की व्यक्तिगत रूप से पहली हार है। -किरपाल सिंह, प्रधान बीकयू चढ़ूनी
कृषि कानूनों की वापसी की घोषणा से खुश हैं किसान
तीनों कृषि कानूनों के वापसी की घोषणा से किसान खुश हैं। लेकिन जब तक संसद में यह रद्द नहीं होता, तब तक आंदोलन जारी रहेगा। एमएसपी पर भी कानून बने। मृतक किसानों को शहीद का दर्जा मिले। -कुलदीप कुंडू, प्रधान बीकेयू टिकैत
यह तो सच्चाई की जीत
कृषि कानूनों को वापस लेना किसानों की जीत और पीएम मोदी की हार है। किसानों के लंबे संघर्ष के आगे मोदी ने फैसला वापस लिया है। सभी सरकारों को समझना चाहिए कि लोकतंत्र में जनता मालिक होती है। -प्रेम गर्ग, अध्यक्ष आम आदमी पार्टी चंडीगढ़।
किसानों को कम आंकना मोदी को महंगा पड़ा
केंद्र की मोदी सरकार किसानों के आंदोलन का मजाक उड़ाती रही, लेकिन अब फैसले को आखिरकार पलटना पड़ा। अन्नदाता जीते हैं। अब जीतते ही रहेंगे। -विक्रम यादव, अध्यक्ष समाजवादी पार्टी चंडीगढ़
एक साल से संघर्षरत किसानों की जीत हुई है। इससे देश के करोड़ों किसानों को लाभ मिलेगा। केंद्र सरकार की ओर से यह निर्णय पहले ही ले लिया जाना चाहिए था। -प्रो. अमरजीत सिंह नौरा, सचिव पुटा, पंजाब विश्वविद्यालय चंडीगढ़