सूत्रों के अनुसार, इस दौरान मुख्यमंत्री ने माझा क्षेत्र के नेताओं के साथ सियासी रणनीति पर चर्चा की, क्योंकि इसी क्षेत्र से अमरिंदर को पार्टी के कई नेताओं के विरोध का सामना करना पड़ रहा है। इसी हफ्ते पंजाब मामलों के प्रभारी हरीश रावत के चंडीगढ़ दौरे के समय प्रदेश अध्यक्ष नवजोत सिद्धू का दिल्ली में हाईकमान से मिलने जाना और वहां केंद्रीय नेतृत्व द्वारा उनको मिलने के लिए समय नहीं देने से कैप्टन और उनके समर्थक उत्साहित हैं।
नवजोत सिद्धू की दिल्ली में हाईकमान के किसी भी नेता से बातचीत नहीं हो सकी और वे इंतजार करके खाली हाथ लौट आए। इससे प्रदेश कांग्रेस में यह संकेत गया है कि हाईकमान अब सिद्धू को लेकर बहुत अधिक उत्साहित नहीं है और आने वाले कुछ दिनों में सिद्धू हाईकमान के अनदेखी का शिकार हो सकते हैं।
अमरिंदर ने बनाई डैमेज कंट्रोल की रणनीति
दूसरी ओर, कैप्टन ने इन्हीं बदलते हालात में अपने लिए डैमेज कंट्रोल की रणनीति बनाई है। पता चला है कि शुक्रवार को लंच मीटिंग के दौरान उन्होंने पार्टी के सीनियर नेताओं के साथ मौजूदा स्थिति पर चर्चा की। इस संबंध में कुछ विधायकों से जब फोन पर जानकारी चाही गई तो उन्होंने विवाद संबंधी किसी मुद्दे पर इस मीटिंग में चर्चा से इनकार किया।
इस मीटिंग में प्रदेश के विकास संबंधी मुद्दों पर चर्चा हुई है। मैंने पिछले दिनों सरकार से बातचीत करके गन्ना किसानों का बड़ा मसला हल करवाया है और गन्ने के दाम संबंधी ऐतिहासिक फैसला लिया गया है। ऐसे और भी कई काम करने हैं जो उनके ध्यान में हैं और जिनसे प्रदेश के लोगों के हित जुड़े हैं।
-प्रताप सिंह बाजवा, राज्यसभा सांसद (कांग्रेस)
कैप्टन सरकार ने जनता से जो वादे किए थे, उनमें से अनेक पूरे कर दिए गए हैं और जो रह गए हैं, उन्हें पूरा करने के सरकार उपाय कर रही है। इसके लिए यह मीटिंग जरूरी थी। - राणा गुरमीत सिंह सोढी खेल मंत्री, पंजाब