पंजाब के बहुचर्चित पोस्ट मैट्रिक स्कॉलरशिप घोटाले में पूर्व मंत्री साधु सिंह धर्मसोत की मुश्किलें बढ़ गई हैं। मुख्यमंत्री भगवंत मान ने 55 करोड़ रुपये के इस घोटाले की फाइल तलब कर ली है। मुख्यमंत्री ने बुधवार को इस मामले की जांच के आदेश दिए हैं। 2020 में इस इस घोटाले का खुलासा हुआ था।
पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह की सरकार के समय इस मामले में पूर्व मंत्री साधु सिंह धर्मसोत को क्लीन चिट दे दी गई थी। सरकार के आदेश पर मुख्य सचिव द्वारा की गई मामले की दोबारा जांच में 39 करोड़ रुपये के भुगतान को सही बताया गया। जबकि घोटाले का खुलासा करने वाले आईएएस कृपा शंकर सरोज ने अपनी रिपोर्ट में लिखा था कि पूर्व मंत्री साधु सिंह धर्मसोत विभाग के एक उपनिदेशक को बचाने में लगे हुए हैं।
मेरी सरकार इन अनियमितताओं की पूरी सच्चाई सामने लाने के लिए प्रतिबद्ध है। जिससे दोषियों को कानून के मुताबिक सजा हो। इन अनियमितताओं के दोषियों की सरकारी खजाने में से एक-एक पैसे की लूट के लिए जवाबदेही तय की जाएगी। - भगवंत मान, मुख्यमंत्री, पंजाब सरकार
पंजाब सरकार के तत्कालीन सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव कृपा शंकर सरोज ने स्कॉलरशिप घोटाले को उजागर किया था। उनके द्वारा 55.71 करोड़ के इस घोटाले की पूरी रिपोर्ट मुख्य सचिव को सौंपी गई थी। रिपोर्ट में लिखा गया था कि 39 करोड़ रुपये मिलीभगत से कथित तौर पर फर्जी संस्थानों के खातों में ट्रांसफर किए गए हैं। उनका कहना था कि 16.71 करोड़ रुपये ऐसे संस्थानों को दिए गए जिन पर पहले से ही वित्तीय अनियमितताएं बतरने के आरोप थे। 8 करोड़ रुपये गैरकानूनी तरीके से ट्रांसफर किए गए जिसका खुलासा सरकार की जांच में हो चुका है।
केंद्रीय सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग की शिकायत पर 2021 जुलाई में सीबीआई ने जांच शुरू की थी। जांच के दौरान सीबीआई चंडीगढ़ के कार्यालय द्वारा पंजाब के सामाजिक न्याय विभाग के प्रधान सचिव से तत्कालीन अतिरिक्त मुख्य सचिव कृपा शंकर सरोज द्वारा 24 अगस्त 2021 को मुख्य सचिव को सौंपी गई रिपोर्ट की सत्यापित कापी मांगी गई थी। हालांकि सरकार ने उस समय सीबीआई को दस्तावेज उपलब्ध नहीं कराए गए।