मुख्यमंत्री ने बताया कि इस दुर्भाग्यपूर्ण घटना को लेकर नेहरू ने तुरंत सुरजीत सिंह मजीठिया का इस्तीफा ले लिया था। मुख्यमंत्री ने कहा कि 'इस घटना ने सिखों के सच्चे किरदार पर सवाल खड़े किए। यह दुख की बात है कि आज भी जब कोई दस्तारधारी सिख मेरठ के प्रशिक्षण केंद्र में जाता है तो उसे घोड़ा चोर की नजर से देखा जाता है।' मान ने कहा कि ब्रिटिश हुकूमत का पानी भरने वाले मजीठिया खानदान को अंग्रेजों ने सर की उपाधि से नवाजा था और यह उपाधि अंग्रेज अपने पिट्ठुओं को देते थे।
मुख्यमंत्री ने कहा कि मजीठिया खानदान ने 13 अप्रैल 1919 को जलियांवाला बाग हत्याकांड के अगले दिन हत्याकांड के दोषी जनरल डायर को खाना परोसा। इससे इनकी घटिया सोच का पता लगता है। यहीं बस नहीं किया, जनरल डायर को सिरोपा भी दिलाया गया और माफी भी दिलाई गई। मान ने कहा कि यह और भी हैरानी की बात है कि सिरोपा देने वाले जत्थेदार अरूड़ सिंह लोकसभा सांसद सिमरजीत सिंह मान के नाना थे। मान ने कहा कि 'इतिहास कभी मिटाया नहीं जा सकता, मजीठिया के पूर्वजों के किरदार इतिहास के पन्नों में दर्ज हैं।'
शिअद का बेड़ा डूब चुका है: मान
शिरोमणि अकाली दल (शिअद) की दयनीय स्थिति का जिक्र करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि इस पार्टी का बेड़ा अब डूब चुका है और हालत यह बनी हुई है कि सुखबीर सिंह बादल और बिक्रम सिंह मजीठिया और हरसिमरत बादल के सुर भी आपस में नहीं मिलते।