प्रशासन की अपील पर दोषी के वकील ने कहा कि मोनू अपने परिवार का एकलौता कमाने वाला 21 साल का युवक है। उसके पिता की मौत हो चुकी है और छोटा भाई बेहद बीमार है। उसे अपनी मां की देखभाल करनी है ऐसे में सजा को न बढ़ाया जाए। कोर्ट ने कहा कि सजा सुनाते हुए न्यायालय को परिस्थितियों को भी ध्यान में रखना पड़ता है। इस मामले में परिस्थितियों को देखते हुए सजा को बढ़ाना ठीक नहीं है।
यह है मामला
12 अक्तूबर, 2014 को शिकायतकर्ता ने पुलिस को दी शिकायत में बताया था कि उसकी बेटी लापता है। वह चंडीगढ़ में रहती है और बर्तन साफ करने का काम करती है। इसके बाद शिकायतकर्ता को पता चला की उसकी पड़ोसन का भतीजा उसकी बेटी को फुसला कर शामली ले गया है।
शिकायतकर्ता पुलिस के साथ शामली गई और बेटी को लेकर आई। पुलिस के सामने बेटी ने कहा कि वह अपनी मर्जी से गई थी लेकिन घर जाने के बाद जब 15 अक्तूबर, 2014 को वह बयान दर्ज करवाने आई तो बताया कि मोनू ने उसे धमकी दी थी कि यदि वह उसके साथ नहीं गई तो पूरे परिवार को मार देगा। इसके बाद पुलिस ने एफआईआर दर्ज की थी।