मां बनने में न करें देरी
इंडियन सोसायटी ऑफ असिस्टेंट रिप्रोडक्टिव के चंडीगढ़ चैप्टर की सोसाइटी की पूर्व अध्यक्ष डॉ. गुरप्रीत कौर का कहना है कि सरोगेसी की प्रक्रिया में किए गए कानूनी बदलाव स्वागत योग्य हैं लेकिन अभी इसमें व्यापक स्तर पर भ्रम की स्थिति है इसलिए करिअर की चाह में या फिगर की चिंता में मां बनने में देरी जैसी गलती कतई न करें। सरोगेसी आईवीएफ के अंतर्गत ही आने वाली एक बेहद महत्वपूर्ण प्रक्रिया है। ऐसा न हो कि आने वाले समय में अन्य प्रक्रियाएं भी जटिल हो जाएं। डॉ. गुरप्रीत ने बताया कि कॉमर्शियल सेरोगेसी पर पूरी तरह रोक लगा दी गई है। ऐसे में ऐसी महिला का मिलना मुश्किल है, जो अपनी इच्छा से दूसरे की संतान को बिना किसी लाभ के अपने कोख में नौ महीने तक पाले।
प्रदूषण, तनाव और अनियमित दिनचर्या बन रही कारण
डॉ. गुरप्रीत कौर का कहना है कि बांझपन की बढ़ती समस्या के लिए प्रदूषण और तनाव का बढ़ता स्तर काफी हद तक जिम्मेदार है। इसके साथ ही भागदौड़ भरी जिंदगी में अव्यवस्थित दिनचर्या भी इसे बढ़ावा दे रही है। महिलाओं की तरह पुरुषों में भी विभिन्न प्रकार के संक्रमण का खतरा बढ़ रहा है, जो गर्भधारण करने में रुकावट का कारण बन रहा है।
इन्हें पड़ती है सेरोगेट की जरूरत
- गर्भाशय न होने पर।
- टीबी की बीमारी से गर्भाशय की समस्या होने पर।
- कैंसर, गुर्दा, अस्थमा, उच्च रक्तचाव सहित अन्य बीमारियां, जिसमें गर्भधारण करना महिला के लिए जोखिम भरा होता है।