हरियाणा के निजी स्कूल सरकार के दबाव में आने को तैयार नहीं हैं। निजी स्कूल संचालकों ने साफ कर दिया है कि गरीब बच्चों की फीस प्रतिपूर्ति की राशि अभी नहीं मिली है। सरकार दाखिलों को लेकर उन पर दबाव न बनाएं। निसा (नेशनल इंडिपेंडेंट स्कूल अलायंस) के राष्ट्रीय अध्यक्ष कुलभूषण शर्मा ने शुक्रवार को पत्रकार वार्ता में ये बातें कहीं। उन्होंने कहा कि 9वीं से 12वीं कक्षा के बच्चों को निशुल्क पढ़ाने की राशि का भी जल्द निर्धारण किया जाए। निजी स्कूलों को दाखिले न करने पर नोटिस न देना अनुचित है। फॉर्म-6 जमा करने की तारीख सरकार बढ़ाए।
कुलभूषण ने कहा कि पिछले 2 वर्षों से स्कूल कोरोना की मार झेल रहे है। बच्चों के सीखने-पढ़ने का नुकसान पहले ही बहुत ज्यादा हो चुका है। जिम, क्लब, शराब के ठेके सब खुले हैं, सरकार तुरंत प्रभाव से नर्सरी से लेकर 12वीं तक के स्कूलों को खोले। हरियाणा सरकार दिसंबर -2021 में फीस रेगुलेशन एक्ट लेकर आई है।
इसके तहत प्राइमरी में 12 हजार तक की सालाना फीस एवं मिडिल स्कूलों में 15 हजार तक की सालाना फीस लेने वाले स्कूलों को बाहर रखा गया है। सरकार से गुजारिश है कि प्राइमरी स्तर पर 20,000, मिडिल स्तर पर 25,000, सेकेंडरी स्तर पर 30,000 व सीनियर सेकेंडरी स्तर पर 35,000 तक सालाना फीस लेने वाले स्कूलों को इस एक्ट के दायरे से बाहर रखा जाए।
सरकार ने 5वीं व 8वीं कक्षा में बोर्ड परीक्षा को मंजूरी दी है। नई शिक्षा नीति के तहत तीसरी, 5वीं व 8वीं कक्षा में स्कूलों की गुणवत्ता जांचने के लिए स्कूल स्टेट रेगुलेटरी अथॉरिटी का गठन करना है। सरकार से अनुरोध है कि नई शिक्षा नीति के सुझाव पर कार्य करें।