चंडीगढ़। तत्कालीन डीजीपी पंजाब सिद्धार्थ चट्टोपाध्याय के फर्जी हस्ताक्षर कर 11 पुलिसकर्मियों की पदोन्नति सूची जारी करने के मामले में एसएसपी कुलदीप चहल ने शुक्रवार को खुद आरोपियों से पूछताछ की। उधर, दोपहर करीब ढाई बजे एसआईटी की टीम आरोपी निरीक्षक सतवंत सिंह को उसके घर लेकर पहुंची और तलाशी ली। यहां से पुलिस को फर्जी दस्तावेज बरामद हुए हैं। पुलिस ने सतवंत का एक लैपटॉप भी कब्जे में ले लिया है।
पुलिस सूत्रों के अनुसार, पूछताछ में कुछ और फर्जी सूचियों के जारी करने का खुलासा आरोपियों ने किया है। पुलिस अब इसकी जांच में जुट गई है। इस पूरे खेल में आरोपी सुपरिंटेंडेंट संदीप कुमार की अहम भूमिका रही है, वही फर्जी सूची टाइप करता था। डीजीपी ऑफिस में तैनात होने से उसे पता था कि आदेश कैसे टाइप किया जाता है। एसएसपी कुलदीप चहल शुक्रवार को सेक्टर-3 थाना पहुंचे और पांचों आरोपियों से कई घंटे तक पूछताछ की। इसके बाद एसआईटी आरोपी सतवंत सिंह को उसके घर लेकर पहुंची।
अब तक पांच आरोपियों की हो चुकी है गिरफ्तारी
इस मामले में अब तक मोहाली फेज-6 निवासी व डीजीपी दफ्तर में तैनात सुपरिंटेंडेंट संदीप कुमार (55), हवलदार मानी कटोच (33), चंडीगढ़ सेक्टर-39 निवासी डीजीपी दफ्तर में तैनात सुपरिंटेंडेंट बहादुर सिंह (52), मोहाली के थ्री बी टू निवासी बर्खास्त उपनिरीक्षक सरबजीत सिंह (47) और फाजिल्का निवासी साइबर सेल मोहाली में तैनात निरीक्षक सतवंत सिंह (48) की गिरफ्तारी हो चुकी है। वहीं पुलिस को अमित गुप्ता नाम के एक संदिग्ध की भी तलाश है।
हरविंदर की तलाश में पटियाला के एक गांव में दबिश
इस पूरे मामले का मास्टरमाइंड उपनिरीक्षक हरविंदर सिंह और उसका बेटा फरार हैं। सोहना थाने में तैनात उप निरीक्षक हरविंदर सिंह के पटियाला के एक गांव में होने की सूचना पर एसआईटी ने वहां दबिश दी, लेकिन हरविंदर सिंह और उसका बेटा वहां नहीं मिले। हरविंदर सिंह का मोबाइल भी कई दिनों से बंद है और वह ड्यूटी पर भी नहीं जा रहा। पुलिस का कहना है की आरोपी की गिरफ्तारी के बाद कई अहम खुलासे होंगे।