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अफीम पर पंजाब में सियासत तेज: नवजोत कौर सिद्धू ने उठाई खेती की मांग, राजनेताओं ने जताया एतराज

Fri, 19 Nov 2021 12:34 PM IST
निवेदिता वर्मा हर्ष कुमार सलारिया, अमर उजाला, चंडीगढ़

सार

अक्तूबर, 2018 में तत्कालीन स्थानीय निकाय मंत्री और पंजाब कांग्रेस के मौजूदा प्रधान नवजोत सिंह सिद्धू ने भी धर्मवीर गांधी की मांग का समर्थन करते हुए अफीम को पंजाब में लीगल करने की मांग की थी।
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अफीम की खेती - फोटो : फाइल
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विस्तार
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पंजाब में विधानसभा चुनाव निकट आते ही अफीम के मुद्दे पर सियासत शुरू हो गई है। इससे पहले साल 2017 के विधानसभा चुनाव के दौरान पटियाला से आप के विधायक धर्मवीर गांधी ने यह मुद्दा उठाया था, जिस पर कई महीनों तक चर्चा तो हुई लेकिन किसी नतीजे पर नहीं पहुंची। अब फिर से चुनाव करीब आते ही अफीम को एनडीपीएस के दायरे से बाहर निकालने के साथ-साथ पंजाब के किसानों को अफीम की खेती की अनुमति देने की मांग शुरू की गई है। बीते दिनों पंजाब प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष नवजोत सिंह सिद्धू की पत्नी नवजोत कौर सिद्धू ने अफीम की राज्य में खेती का समर्थन करते बयान दिया कि अफीम की 25 किस्मों में से केवल कुछ किस्में ही नशा करती हैं, जबकि इसकी अधिकतर किस्में दवा के रूप में लोगों के लिए लाभदायक हैं।

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नवजोत कौर सिद्धू के इस बयान के बाद हरियाणा के कैबिनेट मंत्री अनिल विज, शिअद प्रधान सुखबीर सिंह बादल और पंजाब भाजपा के नेताओं ने कड़ा एतराज जताया, लेकिन प्रदेश कांग्रेस की ओर से कोई प्रतिक्रिया नहीं आई। हालांकि राज्य के उपमुख्यमंत्री सुखजिंदर सिंह रंधावा ने नवजोत कौर सिद्धू के बयान पर एतराज जताते हुए कहा कि पंजाब नशे की चपेट में है और नशे से राज्य को दूर रखने के बजाय वह अफीम को बढ़ावा देने की बात कहकर राज्य के युवाओं को नशे की गर्त में भेजना चाहती हैं। 
 
वहीं शिअद प्रधान सुखबीर बादल ने नवजोत कौर सिद्धू पर निशाना साधते हुए गुरुवार को कहा कि शायद नवजोत कौर को अफीम की जरूरत है लेकिन पंजाब में उन्हें यह नहीं मिल पा रही, जिसके चलते उन्होंने अफीम की खेती की मांग उठाई है।
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साल 1985 के बाद अफीम की बिक्री व सेवन दोनों अपराध
भारत में 1947 तक अफीम की खेती को अंग्रेजी हुकूमत ने अपने अधिकार में रखा था जबकि आजादी के बाद राजस्थान, यूपी, मध्य प्रदेश सहित कई राज्यों में अफीम की खेती को मंजूरी दे दी गई। पंजाब को इसकी खेती से अलग रखा गया और 1985 में बने एनडीपीएस एक्ट के अधीन अफीम की बिक्री और सेवन दोनों को अपराध करार दे दिया गया। धर्मवीर गांधी की तरह की अब नवजोत कौर सिद्धू ने अफीम की खेती को पंजाब के लिए उपयुक्त बताया है। उनका दावा है कि केमिकल नशों की दलदल में फंसे पंजाब को अफीम की खेती से राहत मिलेगी। नवजोत कौर सिद्धू का भी यही मानना है कि अफीम की खेती की अनुमति मिलने से राज्य में हेरोइन, चिट्टा, स्मैक जैसे घातक नशों का प्रयोग और तस्करी को हतोत्साहित किया जा सकता है।

नवजोत सिद्धू भी कर चुके हैं अफीम का समर्थन
उल्लेखनीय है कि अक्तूबर, 2018 में तत्कालीन स्थानीय निकाय मंत्री और पंजाब कांग्रेस के मौजूदा प्रधान नवजोत सिंह सिद्धू ने भी धर्मवीर गांधी की मांग का समर्थन करते हुए अफीम को पंजाब में लीगल करने की मांग की थी। उनका कहना था कि हेरोइन जैसे अन्य घातक नशों से अफीम कहीं ज्यादा बेहतर है। अफीम के सेवन को सही ठहराते हुए उन्होंने यह भी दलील दी थी कि उनके चाचा अफीम का सेवन करते थे और वह सेहतमंद और लंबी उम्र तक जीए।

एनडीपीएस केसों में पंजाब दूसरे नंबर पर
नेशनल क्राइम रिकार्ड ब्यूरो के अनुसार, भारत में वर्ष 2017, 2018 और 2019 के दौरान दर्ज किए गए एनडीपीएस केसों के मामले में महाराष्ट्र के बाद पंजाब दूसरे नंबर पर रहे। साल 2020 में उत्तर प्रदेश 10852 एनडीपीएस केसों के साथ पहले, पंजाब 6909 केसों के साथ दूसरे और तमिलनाडु 5403 केसों के साथ तीसरे नंबर पर है।

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