पीजीआई चंडीगढ़ में गंभीर बीमारियों से पीड़ित रोगियों का इलाज अब थोड़ा महंगा हो गया है। कई रोगों की जांच का शुल्क दोगुना कर दिया गया है। कई जांचों के शुल्क में 20 से 40 फीसदी तक की बढ़ोतरी कर दी गई है। नए रेट तत्काल रूप से लागू कर दिए गए हैं। यह फैसला हॉस्पिटल चार्ज कमेटी की मीटिंग में लिया गया है। जांच शुल्क बढ़ाने पर पीजीआई की ओर से तर्क दिया गया है कि जितना एम्स में रेट है, उतना ही बढ़ाया गया है और यह रेट प्राइवेट के मुकाबले बहुत कम है। इससे मरीज पर ज्यादा असर नहीं पड़ेगा।
हालांकि कुछ नए टेस्ट भी शुरू किए गए हैं, जो पीजीआई में आने वाले मरीजों के लिए राहत की बात है। पीजीआई के सूत्रों ने बताया कि हॉस्पिटल चार्ज कमेटी टेस्ट समय-समय पर टेस्टों के रेट रिव्यू करता है। टेस्ट की प्रक्रिया में इस्तेमाल होने वाले केमिकल और मशीनरी के दाम समय-समय पर बढ़ते रहते हैं। ऐसे में पीजीआई की ओर से शुल्क बढ़ाना मजबूरी होता है। पीजीआई की ओर से करीब तीन दर्जन टेस्टों के रेट रिवाइज किए गए हैं।
इनमें नेत्र विभाग, एडवांस पीडियाट्रिक सेंटर, बायोटेक्नोलाजी, हीपैटोलॉजी, रेडियो डायग्नोसिस, साइटोलॉजी एंड गाइनी पैथोलॉजी, हेड एंड नेक सर्जरी, मेडिकल माइक्रोबायोलॉजी और रीनल ट्रांसप्लांट सर्जरी के टेस्ट शामिल हैं। पीजीआई की ओर से टेस्ट की नई लिस्ट अपडेट कर दी गई है। साथ ही सभी संबंधित डिपार्टमेंट को इस बारे में सूचना भी दे दी गई है। हालांकि कुछ मरीजों का कहना है कि पीजीआई के टेस्ट भी महंगे हैं। इन्हें सस्ता करना चाहिए, उल्टा महंगा कर रहे हैं।
पीजीआई ने कुछ नए टेस्ट भी शुरू किए हैं। इनमें प्रमुख रूप से इम्यूनो पैथोलॉजी डिपार्टमेंट के क्वार्ड स्क्रीन, ट्रिपल टेस्ट, एंटी एमओजी एंटीबायोटिक्स, एलर्जी कॉम्प्रिहेंसिव प्रोफाइल फूड जैसे टेस्ट शामिल हैं। इनमें क्वार्ड स्क्रीन व ट्रिपल टेस्ट काफी महत्वपूर्ण टेस्ट हैं, जो बच्चे के जन्म से पहले किए जाते हैं। पीजीआई में टेस्ट नहीं होने के कारण मरीजों को प्राइवेट में टेस्ट करवाना पड़ता था, जो काफी महंगा होता था। पीजीआई के डायरेक्टर प्रो. जगतराम ने बताया कि रेट बढ़ाने का फैसला गठित कमेटी ने लिया है। रेटों में मामूली वृद्धि की गई है।