हरियाणा में पंचायत चुनाव सर्दियों तक खिंच सकते हैं। कोरोना संक्रमण के बढ़ते मामले और पंचायतों की वार्डबंदी का काम पूरा न होने के चलते यह मामला खिंचता जा रहा है। उपमुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला ने सभी जिलों के उपायुक्तों से वार्डबंदी की रिपोर्ट एक माह के अंदर मांगी है लेकिन वार्ड बंदी हो भी जाए तो मौका और माहौल सरकार के लिए मुफीद नहीं है।
मुख्यमंत्री मनोहर लाल इस बारे में पहले ही कह चुके हैं कि माहौल देखकर चुनाव करवाया जाएगा। इस बीच पंचायतों के विकास से जुड़ा कोई काम रुकने नहीं दिया जाएगा। अपने निवास पर पत्रकारों से बातचीत में दुष्यंत ने यह संकेत दिए हैं कि पंचायत चुनाव में देरी हो सकती है। ऐसे में यदि मई जून तक चुनाव नहीं हुए तो चौमास में चुनाव करवाना वैसे भी मुश्किल है।
मालूम हो कि प्रदेश में पंचायतों का कार्यकाल 23 फरवरी को पूरा हो गया था। जिला परिषद, ब्लॉक समिति व ग्राम पंचायतों के चुनाव को लेकर वार्डबंदी का काम जारी है। लगभग 200 नई पंचायतों का गठन हुआ है। संबंधित विभाग द्वारा उपायुक्तों को पत्र लिखकर वार्डबंदी प्रक्रिया एक महीने तक पूरी कर रिपोर्ट मांगी गई है।
पत्र में उपायुक्तों से आरक्षित सीटों का खाका भी तैयार करने के लिए कहा गया है। देरी के पीछे किसान आंदोलन भी एक बड़ा कारण बन चुका है। दूसरी ओर पंचायत चुनावों में महिलाओं के लिए 50 प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान है लेकिन इसमें ऑड-ईवन फार्मूला लागू करने के चलते मामला न्यायालय में विचाराधीन है।
मंत्रिमंडल विस्तार के साथ ही तय हो जाएंगे बोर्ड निगम के चेयरमैन
दुष्यंत ने कहा है कि हरियाणा मंत्रिमंडल विस्तार जल्द हो सकता है। बोर्ड निगम के चेयरमैन भी इसी के साथ तय हो जाएंगे। जल्द ही यह काम पूरा हो जाएगा। मालूम हो कि जजपा कोटे से एक तथा भाजपा से एक मंत्री बनना है। जजपा चाहती है कि मंत्रिमंडल विस्तार हो जाए। आलाकमान से भी जजपा इस बारे में कई बार गुजारिश कर चुकी है लेकिन भाजपा की ओर से हो रही देरी के कारण विस्तार रुका हुआ है।
नई आबकारी नीति पर हो रहा मंथन
हरियाणा में नई आबकारी नीति को अंतिम रूप देने को लेकर आयोजित बैठक में विचार किया जाएगा कि पॉलिसी कितने समय के लिए लागू की जाए। शराब ठेकेदारों ने एक साल के लिए लागू करने की बात कही है। सरकार ने लॉकडाउन के बावजूद 700 करोड़ कमाए हैं। ऐसे में मौजूदा वित्त वर्ष में 800 करोड़ से अधिक राजस्व की उम्मीद है।