केंद्रीय वित्त मंत्री एक फरवरी को चंडीगढ़ समेत पूरे देश के लिए केंद्रीय बजट की घोषणा करेंगी। वित्त वर्ष 2022-23 का अब लगभग पूरा होने वाला है। इस वर्ष के लिए मिले बजट में से प्रशासन ने 20 जनवरी 2023 तक करीब 88 फीसदी खर्च कर दिया है। बेशक केंद्र की तरफ से हर मद में मिले बजट का औसतन 85 फीसदी से ज्यादा पैसा खर्च हो गया है, लेकिन छात्रवृत्ति का 10 फीसदी भी नहीं खर्चा है। छात्रवृत्ति के लिए 4.36 करोड़ रुपये मिले हैं और इसमें से 39 लाख रुपये ही खर्चे हैं।
यूटी प्रशासन का वर्तमान बजट 5779.11 करोड़ रुपये है। इसमें रेवेन्यू हेड यानी वेतन, भत्ते व अन्य खर्चों के लिए 5306.64 करोड़ जबकि कैपिटल हेड यानी विकास कार्यों के लिए 472.47 करोड़ रुपये मिले हैं। प्रशासन ने अब तक (एक अप्रैल 2022 से 20 जनवरी 2023) तक रेवेन्यू हेड में 4668.73 करोड़ (87.98 फीसदी) और कैपिटल हेड में 353.62 करोड़ (74.84 फीसदी) खर्चे हैं। वित्त वर्ष 2022-23 में प्रशासन को बजट में सबसे ज्यादा तनख्वाह, वेजेज, ग्रांट-इन-ऐड (जनरल), ग्रांट-इन-ऐड (वेतन) और सप्लाई-मटेरियल के लिए कुल 4741.68 करोड़ रुपये मिले हैं।
प्रशासन ने इसमें से 4219.21 करोड़ रुपये खर्च कर दिए हैं। प्रशासन ने अब तक वेतन के बजट का 85.54 फीसदी, रिवार्ड का 84.83 फीसदी, रेंट रेट्स एंड टैक्सेज का 90.70, क्लोदिंग एंड टेंटेज का 90.78, ग्रांट-इन-ऐड (जनरल) का 96.24 फीसदी, सप्लाई व मटेरियल का 96.90 फीसदी, ग्रांट-इन-ऐड (सैलरी) का 77.52 फीसदी, माइनर वर्क का 90.06 फीसदी खर्च कर दिया है।
ऑफिस के खर्चे के नाम पर 87.13 करोड़ रुपये खर्चे
यूटी प्रशासन ने वर्तमान बजट में से ऑफिस के खर्चे के नाम पर 101.66 करोड़ में से 87.13 करोड़ रुपये, विज्ञापन और पब्लिसिटी के नाम पर 72 लाख रुपये खर्च किए गए हैं, लेकिन छात्रवृत्ति पर महज 39 लाख रुपये ही खर्चे हैं, जबकि इसके लिए केंद्र से 4.36 करोड़ रुपये मिले हैं। विदेश यात्रा के लिए मिले 40 लाख रुपये के बजट में से 9 लाख खर्च हुए हैं जबकि घरेलू यात्रा के 2.10 करोड़ के बजट में से 1.26 करोड़ खर्च किए हैं। सीक्रेट सर्विस के नाम पर 1.05 करोड़, प्रोफेशनल सर्विस के लिए 9.61 करोड़, माइनर वर्क के नाम पर 65.36 करोड़ तो मेजर वर्क के लिए 301.11 करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं। कैपिटल बजट में मोटर वाहन के लिए मिले 16 करोड़ में से 11.17 करोड़ रुपये और मशीनरी और इक्यूप्मेंट्स पर 18.64 करोड़ खर्चे हैं।
वर्ष 2023-24 के लिए प्रशासन ने केंद्र से मांगे 7000 करोड़
यूटी प्रशासन ने वर्ष 2023-24 के लिए केंद्र सरकार से करीब 7000 करोड़ रुपये मांगे हैं। यह अब तक की सबसे बड़ी बजट की मांग है। वर्तमान बजट से भी 1221 करोड़ रुपये ज्यादा है। प्रशासन के अधिकारियों का कहना है कि बड़े बजट की मांग इसलिए की गई है ताकि रुकी हुई परियोजनाओं और गांवों के विकास को गति दी जा सके। अतिरिक्त पैसा नगर निगम में शामिल हुए गांवों के विकास कार्य, कचरा निस्तारण प्लांट का कायाकल्प व प्रशासन की कुछ प्रमुख परियोजनाओं के लिए मांगा गया है।
किस साल कितना बजट मिला
वर्ष मांग बजट मिला
2022-23 5836 करोड़ 5382.79 करोड़
2021-22 5670.31 करोड़ 5186.12 करोड़
2020-21 5300 करोड़ 5138.10 करोड़
2019-20 5218 करोड़ 4753.12 करोड़
2018-19 5908 करोड़ 4511.91 करोड़
2017-18 6151 करोड़ 4312.40 करोड़
2016-17 5489 करोड़ 3937.47 करोड़
2015-16 4229 करोड़ 3543 करोड़