स्टेडियमों से भीड़ को बाहर करने की तैयारी
खेल स्टेडियमों में सुबह और शाम बाहरी लोग सैर के लिए आते हैं। विभाग का तर्क है कि इस दौरान खिलाड़ी ट्रैक पर दौड़ते हैं और बीच में लोग आ जाते हैं। इससे खिलाड़ी चोटिल हो जाते हैं। विभाग की मंशा है कि बाहरी लोगों खेल परिसर में कम से कम आएं। अगर आएं तो इसके लिए उनको प्रति माह एक हजार रुपये की राशि देनी होगी। इसके बाद ही उनका प्रवेश हो सकेगा।
खेल परिसरों में बाहरी लोगों की बढ़ती संख्या को देखते हुए यह फैसला लिया है। बाहरी लोगों के सुबह-शाम आने से खिलाड़ियों का खेल प्रभावित होता है। दूसरा कई बार लोगों के कारण ट्रैक पर खिलाड़ी चोटिल भी हो चुके हैं। असल खिलाड़ियों के लिए मात्र 100 रुपये फीस रखी गई है, ताकि उसे अहसास हो कि खेल परिसर की सेवाएं ले रहा है। - पंकज नैन, खेल निदेशक।
प्रवेश शुल्क पर भड़की कांग्रेस और इनेलो
हरियाणा के खेल स्टेडियमों में प्रवेश शुल्क लगाने पर सियायत गरमा गई है। कांग्रेस और इनेलो ने खिलाड़ियों, आम लोगों के लिए शुल्क तय करने का कड़ा विरोध किया है। नेता प्रतिपक्ष भूपेंद्र हुड्डा, कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष कुमारी सैलजा और इनेलो विधायक अभय चौटाला ने कहा है कि सरकार फैसले को तुरंत वापस ले। इससे खिलाड़ियों व लोगों की जेब पर अतिरिक्त बोझ पड़ेगा।
हुड्डा ने ने कहा कि कांग्रेस कार्यकाल में हरियाणा को खेलों का हब बनाया था। गांव-गांव और शहर-शहर में खेल स्टेडियम बनाए थे लेकिन भाजपा सरकार ने सब भगवान भरोसे छोड़ दिया। यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है कि अब सरकार स्टेडियमों को वसूली का अड्डा बनाने जा रही है।
खेल परिसरों में बड़ी तादाद में युवा खेलने, प्रतियोगिताओं के अलावा सेना व पुलिस भर्ती की तैयारी करने आते हैं। आम आदमी वर्जिस कर स्वास्थ्य लाभ लेने जाता है। यह कोई पब, क्लब, बार या डिस्को नहीं है, जहां सरकार कर लगाना चाहती है।
सैलजा ने कहा कि भाजपा-जजपा सरकार हर स्तर पर जनता को लूटने में लगी है। सरकार अपने इस तुगलकी आदेश को फौरन वापस ले। खिलाड़ियों को हर माह सौ रुपये व घूमने आने वाले लोगों को एक हजार रुपये शुल्क देना होगा। प्रदेश के राज्य स्तरीय, सभी जिला स्तरीय और उपमंडल स्तरीय खेल स्टेडियमों में यह नियम लागू कर दिए गए हैं। खेल एसोसिएशन के लिए भी स्टेडियम में आयोजन करवाने के लिए फीस निर्धारित की गई है। महंगाई की चक्की में पिस रही जनता पर यह सरकार का एक और प्रहार है।
अभय चौटाला ने स्टेडियम में प्रवेश शुल्क को जजिया कर करार दिया है। उन्होंने कहा कि गठबंधन सरकार नहीं चाहती, खेलों में हरियाणा का वर्चस्व बरकरार रहे। सरकार के इस फैसले से यह साबित हो गया है कि वह खिलाड़ियों की संरक्षक नहीं, बल्कि विरोधी है। इनेलो इसका पुरजोर विरोध करती है। सरकार से मांग है कि तुरंत फैसले को वापस ले।