चंडीगढ़। शहर की हॉकी टीम के प्रशिक्षु और टोक्यो ओलंपिक में कांस्य पदक जीतने वाली भारतीय पुरुष हॉकी टीम का हिस्सा रहे रुपिंदर पाल सिंह ने वीरवार को अंतरराष्ट्रीय हॉकी से संन्यास ले लिया। अपने आधिकारिक ट्विटर हैंडल से एक भावुक पोस्ट साझा कर उन्होंने यह जानकारी दी।
उन्होंने कहा कि पिछले कुछ महीने मेरे जीवन के सबसे अच्छे दिन थे। टोक्यो में अपने साथियों के साथ पोडियम पर खड़ा होना मेरी जिंदगी का सबसे खूबसूरत पल था और मैं उसे कभी नहीं भूल पाऊंगा। मेरा मानना है कि यह समय युवा और प्रतिभाशाली खिलाड़ियों को मौका देने का है, जिससे वे भी उस चीज का अनुभव कर पाएं जो मैंने पिछले 13 वर्षों में भारत का प्रतिनिधित्व करते हुए महसूस की है।
बेहतरीन ड्रैग फिल्कर रहे
रुपिंदर पाल सिंह का नाम भारत के सफल ड्रैग फिल्करों में शुमार है। उन्होंने 2008 में डेब्यू करने के बाद अपने कॅरिअर में भारत की तरफ से 223 मैचों में भाग लेकर 119 गोल किए।
2002 में चंडीगढ़ से शुरू हुआ था हॉकी का सफर
रुपिंदर पाल सिंह चंडीगढ़ हॉकी अकादमी में 2002 के बैच में आए थे। यहां पर हॉकी की कड़ी ट्रेनिंग लेने के बाद बेहतर प्रदर्शन के आधार पर 2007 में जूनियर हॉकी टीम में जगह बना ली थी। टोक्यो ओलंपिक में रुपिंदर पाल सिंह ने कुल 4 गोल दागे। इनमें 2 पेनाल्टी स्ट्रोक के जरिए किए। यह उनका दूसरा ओलंपिक था।
कोच बोले- बेहतर रहा रुपिंदर का हॉकी सफर
शहर की सेक्टर-42 स्थित खेल विभाग की हॉकी अकादमी के मौजूदा समय के वरिष्ठ कोच गुरदिंर सिंह ने कहा कि जब वह अकादमी में था तो उसे सभी बॉब के नाम से जानते थे। हॉकी में उसका सफर बेहतर रहा। टोक्यो ओलंपिक में बेहतर खेला। अच्छे समय पर संन्यास ले लिया।
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