फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे में खुलासा: चंडीगढ़ के सरकारी अस्पतालों में भी बढ़ रहा सिजेरियन डिलीवरी का आंकड़ा

Thu, 23 Dec 2021 03:38 PM IST
निवेदिता वर्मा वीणा तिवारी, अमर उजाला, चंडीगढ़

सार

विश्व स्वास्थ्य संगठन के मानक के अनुसार सिजेरियन डिलीवरी की दर 15 फीसदी से ज्यादा नहीं होनी चाहिए लेकिन चंडीगढ़ के निजी अस्पतालों की तरह अब सरकारी में भी सिजेरियन का आंकड़ा तेजी से बढ़ रहा है।
विज्ञापन
pregnancy
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

गर्भावस्था के दौरान लापरवाही के चलते निजी अस्पतालों की तरह अब सरकारी अस्पतालों में भी सिजेरियन डिलीवरी का आंकड़ा तेजी से बढ़ रहा है। इसका खुलासा नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे की हालिया रिपोर्ट में हुआ है। इसमें 2020-21 में चंडीगढ़ के निजी अस्पतालों में सिजेरियन डिलीवरी का आंकड़ा 44.4 प्रतिशत बताया गया है, जो पिछले सर्वे से महज 0.4 प्रतिशत ज्यादा है, लेकिन इसे लेकर सरकारी अस्पतालों की स्थिति चिंताजनक है। सर्वे में सरकारी अस्पतालों में सिजेरियन डिलीवरी का आंकड़ा 30.4 प्रतिशत बताया गया है, जो पिछले सर्वे की रिपोर्ट से 10 प्रतिशत ज्यादा है। महज चार साल में 10 प्रतिशत का इजाफा बेहद चिंताजनक है। विशेषज्ञों का कहना है कि युवतियों को इसे गंभीरता से लेना चाहिए, क्योंकि गर्भावस्था से पहले और उस दौरान छोटी से छोटी लापरवाही उन्हें इस ओर धकेल सकती हैं। 

विज्ञापन


विश्व स्वास्थ्य संगठन के मानक के अनुसार सिजेरियन डिलीवरी की दर 15 फीसदी से ज्यादा नहीं होनी चाहिए। लेकिन सर्वे के आंकड़े बताते हैं कि शहर के निजी अस्पतालों की तरह अब सरकारी में भी सिजेरियन का आंकड़ा तेजी से बढ़ रहा है। नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे-5 के अनुसार देश में 2015-16 के बीच सिजेरियन डिलीवरी की दर 17.2 फीसदी थी, जो साल 2020-2021 में बढ़कर 21.5 फीसदी पहुंच गई। इसका मतलब है कि प्राइवेट या सरकारी अस्पताल में बच्चे को जन्म देने वाली हर 5 में से एक महिला की सिजेरियन डिलीवरी हो रही है।

गर्भावस्था क दौरान भोजन हो ऐसा नाश्ता 

  • ताजे फलों के साथ एक कटोरी दलिया, एक प्लेट रवा, उपमा व पोहा 
  • सब्जियों के साथ सेवईं, मक्खन और आमलेट के साथ होल ग्रेन ब्रेड टोस्ट के 2 स्लाइस
  • एक ग्लास लो-फैट दूध, बटर मिल्क या फोर्टिफाइड ऑरेंज जूस, एक आमलेट
  • वेजिटेबल सैंडविच, गाजर, पालक के पराठे दही के साथ या मिक्स वेज के साथ

दोपहर का भोजन 

  • दाल के साथ 2 रोटियां, एक कटोरी दही या मिक्स सब्जी, कोफ्ता, पनीर। 
  • जीरा या मटर के चावल, सब्जी के साथ बने चावल, खिचड़ी या लेमन राइस के साथ रायता
  • रोटी के साथ एक कटोरी चिकन करी और चावल। एक कटोरी पालक पनीर रोटी या चावल के साथ

शाम का स्नैक्स 

  • ताजे फल या फ्रूट स्मूदी मुट्ठी भर अखरोट, बादाम, खजूर या ताजे फलों से तैयार जूस
  • सब्जी या पालक की इडली, पनीर, मकई या सब्जी सैंडविच, गुड़ या कम चीनी से बना गाजर या लौकी का हलवा
  • एक कप गर्म पानी में ग्रीन टी, सब्जियों के साथ दलिया या उत्तपम, भुना हुआ चना 

रात का भोजन 

  • दाल के साथ 2 रोटी, सलाद, और दही वेजिटेबल रायता के साथ वेजिटेबल पुलाव या छाछ के साथ सादा पराठा -ज्वार/बाजरे की रोटी, घी और रायते के साथ। सब्जी के साथ मिश्रित दाल खिचड़ी और दही चुकंदर और गाजर की खीर। 

(पीजीआई सामुदायिक चिकित्सा विभाग की आहार विशेषज्ञ डॉ. पूनम खन्ना के अनुसार)

सीजेरियन दे सकता है नुकसान 

स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार सी-सेक्शन या सिजेरियन एक बड़ी सर्जरी है, इसके खतरे भी हैं। इसमें संक्रमण का खतरा अधिक होता है। महिलाओं को अधिक रक्त बहने, रक्त के थक्के जमने, अधिक समय तक अस्पताल में रहना और डिलीवरी के बाद उबरने में अधिक समय लगना जैसी परेशानियां हो सकती है। पहली सिजेरियन डिलीवरी होने पर अगले प्रसव में भी सिजेरियन करने की मजबूरी बन जाती है। 

क्यों करनी पड़ती है सर्जरी  

  • गर्भवती महिला का ब्लड प्रेशर बढ़ने या दौरा पड़ने की स्थिति में
  • रेफरल सेंटर में सिजेरियन की संख्या अन्य जगहों की तुलना में सामान्य तौर पर ज्यादा होती है। 
  • प्लानिंग कर डिलीवरी की डेट तय करने पर सिजेरियन को विकल्प के तौर पर चुना जाना। 
  • गर्भावस्था के दौरान खान-पान व साफ-सफाई को लेकर लापरवाही बरतना।
  • कई बार दवाओं से बच्चेदानी का मुंह नहीं खुल पाता, ऐसे में सर्जरी करनी पड़ती है। 
  • ज्यादा खून बहने पर भी सिजेरियन करना पड़ता है।
  • बच्चे की धड़कन कम होने या गले में गर्भनाल लिपटी होने, बच्चे का आड़ा या उल्टा होना, कमजोरी या खून का दौरा कम होने पर भी ऑपरेशन होता है।  
  • बच्चा जब पेट में ही गंदा पानी (मल, मूत्र) छोड़ देता है जिसे मिकोनियम कहते हैं, इस स्थिति में तुरंत ऑपरेशन कर बच्चे की जान बचाई जाती है।
  • गर्भद्वार पर किसी प्रकार की रुकावट हो, जिससे सामान्य डिलीवरी लगभग नामुमकिन हो जाए। अगर महिला एचआईवी-पॉजिटिव हो और गर्भावस्था के करीब की गई रक्त
  • जांच में यह बात सामने आए कि आपको वायरल लोड है।

नोट- ये जानकारी पूर्व निदेशक स्वास्थ्य व स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. अमनदीप कंग ने दी। 

आंकड़े बयां कर रहे हकीकत (नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे की रिपोर्ट)

स्थान                           सिजेरियन 2015-16           सिजेरियन  2020-21
निजी अस्पताल                 44 प्रतिशत                       44.4 प्रतिशत

विज्ञापन

सरकारी अस्पताल            19.5 प्रतिशत                    30.4 प्रतिशत

गर्भावस्था के दौरान सैर और व्यायाम बेहद जरूरी है। श्रम शक्ति को बढ़ाने का प्रयास करें। झाड़ू-पोछा लगाना बेहद फायदेमंद होता है। तनाव न पालें। 30 साल की उम्र से पहले मां बनने पर ऐसी समस्या कम होती है। खानपान को लेकर सचेत रहें। प्लान डिलीवरी को तवज्जो दें। -डॉ. गुरप्रीत सिंह बेदी, चेयरमैन इंडियन सोसाइटी ऑफ असिस्टेंट रिप्रोडक्टिव

विज्ञापन
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें