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मनीष तिवारी के निशाने पर हरीश रावत: कहा- इतनी अराजकता 40 साल में कभी नहीं देखी, दागे कई सवाल

Sun, 24 Oct 2021 04:13 PM IST
ajay kumar अमर उजाला डिजिटल डेस्क, चंडीगढ़

सार

उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत अब कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी के निशाने पर आ गए हैं। हरीश रावत के एक इंटरव्यू पर मनीष तिवारी ने अपनी प्रतिक्रिया दी। तिवारी ने रावत से उन मुद्दों पर प्रगति के बारे में पूछा जिनकी वजह से अमरिंदर सिंह को सीएम पद से हटाया गया।  
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कांग्रेस नेता मनीष तिवारी (फाइल फोटो) - फोटो : पीटीआई
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विस्तार
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कांग्रेस में नेताओं के बीच मतभेद खत्म नहीं हो रहे हैं। नवजोत सिंह सिद्धू से विवाद के बाद कैप्टन अमरिंदर सिंह ने मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया था। इसके बाद चरणजीत सिंह चन्नी को पंजाब का सीएम बनाया गया। सिद्धू की चन्नी से भी नहीं बन रही है।

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हरीश रावत ने पार्टी की पंजाब इकाई में मचे घमासान को थामने की बहुत कोशिश की। लेकिन इस बीच वे खुद ही नेताओं के निशाने पर आ गए हैं। अब हरीश रावत कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी के निशाने पर हैं। इससे पहले कैप्टन अमरिंदर सिंह और रावत के बीच जुबानी जंग हो चुकी है।

मनीष तिवारी ने ट्वीट किया कि आदरणीय हरीश रावत जी! मेरे मन में आपके प्रति बहुत सम्मान है, जब आप कांग्रेस सेवादल और मैं एनएसयूआई का नेतृत्व करता था। आपने एक इंटरव्यू में मेरा उल्लेख किया है। हालांकि कांग्रेस में 40 से अधिक वर्षों में मैंने इतनी अराजकता कभी नहीं देखी।
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हरीश रावत के इंटरव्यू पर तिवारी का पलटवार
मनीष तिवारी ने एक इंटरव्यू में कहा था कि सीमावर्ती राज्य में अमरिंदर सिंह ने कैसे यहां के मुद्दे और राजनीतिक स्थिति को प्रबंधित किया है, यह समझने में पार्टी प्रभारी विफल रहे हैं। इस पर हरीश रावत ने कहा कि कांग्रेस ने हमेशा अमरिंदर सिंह के कामकाज के तरीके का सम्मान किया है। इसलिए वे साढ़े चार साल सीएम रहे।

किसी ने कोई सवाल नहीं उठाया। जब उनकी सरकार बरगाड़ी मामले में विफल रही और अदालत ने एसआईटी की रिपोर्ट को खारिज कर दिया तो विधायक और मंत्री बेचैन हो गए थे। दिल्ली आकर वे शिकायत करने लगे। कुछ मुद्दों को सार्वजनिक रूप से उठाया गया, कुछ मंत्रियों ने कैबिनेट से इस्तीफा देने की पेशकश भी की।

कांग्रेस आलाकमान ने विधायकों की सीएलपी (कांग्रेस विधायक दल) बैठक की मांग को लगभग मान लिया था। कोई भी राजनीतिक दल अपने विधायकों की एक बड़ी संख्या को सुनने से कैसे इंकार कर सकता है जो लगातार सीएलपी की बैठक के लिए दबाव बना रहे थे। कैप्टन अमरिंदर सिंह दिए गए बिंदुओं के चार्टर को पूरा करने में विफल रहे। यही वजह है कि बदलाव किया गया। 

तिवारी ने पूछा- इन मुद्दों पर प्रगति कहां है
तिवारी ने आगे लिखा कि क्या हमें लगता है कि पंजाब के लोग इस डेली सोप ओपेरा से घृणा नहीं करते हैं? विडंबना यह है कि जिन लोगों ने सबसे अधिक उल्लंघन और अस्वीकार्य कार्य की शिकायत की, वे दुर्भाग्य से स्वयं सबसे खराब अपराधी बने हैं। इतिहास दर्ज करेगा कि समिति की नियुक्त जिसने जिसने प्रत्यक्ष रूप से कथित और वास्तविक शिकायतों को सुना, निर्णय की एक गंभीर त्रुटि थी। इन विधायकों और अन्य गणमान्य लोगों को उत्तेजित करने वाले मुद्दे बरगाड़ी, ड्रग्स, पावर पीपीए, अवैध रेत खनन पर प्रगति कहां है। क्या कोई आंदोलन आगे बढ़ा है।
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