देश के कई राज्यों में लंपी बीमारी से पशुओं की मौत हो रही है। चंडीगढ़ भी में रोजाना 8-9 केस आ रहे हैं और अब तक करीब 250 पशु इस बीमारी की चपेट में आ चुके हैं। इस बीमारी से गायों को बचाने के लिए पशुपालन विभाग के पास 10 हजार वैक्सीन पहुंच चुकी हैं।
पशुपालन विभाग की 13 टीमें गोशाला और पशुपालकों के पास जाकर गायों को मुफ्त टीका लगा रही हैं। टीकाकरण चंडीगढ़ के विभिन्न गांवों में कार्यरत चार पशु चिकित्सा अस्पतालों और नौ पशु चिकित्सा उप केंद्रों के माध्यम से किया जाएगा। पशुपालन विभाग के संयुक्त निदेशक डॉ. कंवरजीत ने बताया कि रोग की पुष्टि के लिए विभाग पहले ही 17 रक्त के नमूने क्षेत्रीय रोग निदान केंद्र और आईसीएआर-राष्ट्रीय उच्च सुरक्षा पशुरोग संस्थान (एनआईएचएसएडीएल) भोपाल भेज चुका है।
डॉ. कंवरजीत ने बताया कि विभाग की तरफ से शहर के सभी पशु पालकों को दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं। सभी के पास विभाग की टीम जा चुकी है और उनके पास एक पंफलेट चिपकाया गया है, जिसमें सभी जानकारी दी गई है। जो भी पशुपालक उन्हें बीमारी की जानकारी देता है, रैपिड रिस्पांस टीम पहुंचती है और उस गाय को आइसोलेट करती है। पशुपालक को भी कई तरह के दिशा निर्देश देती है। इसके अलावा पशुपालन और मलेरिया विभाग मिलकर विभिन्न पशुपालकों के यहां फॉगिंग कर रहे हैं। बता दें कि शहर में अब तक डड्डूमाजरा में इस बीमारी की वजह से एक गाय की मौत हुई है।
चंडीगढ़ के पशुपालकों के पास भैंस ज्यादा इसलिए ज्यादा नहीं फैली बीमारी
डॉ. कंवरजीत ने बताया कि चंडीगढ़ के पशुपालकों के पास भैंसों की संख्या ज्यादा है। शहर में करीब 300 पशुपालक हैं, जिनके पास कुल मिलाकर करीब 24 हजार गाय-भैंसे हैं। इनमें से 75 फीसदी भैंस हैं। ये चंडीगढ़ के लिए राहत की बात है, क्योंकि लंपी बीमारी सिर्फ गायों में नजर आ रही है इसलिए भी केस कम हैं। हालांकि विभाग ने स्पष्ट निर्देश जारी किए हैं कि अभी पशुपालक न तो गाय-भैंसों को खरीदें और न ही बेचें।