लुधियाना शहर की घनी आबादी वाले ग्यासपुरा इलाके की 33 फुटा रोड पर स्थित रिहायशी क्षेत्र में रविवार को जहरीली गैस की चपेट में आने से दो बच्चों समेत 11 लोगों की मौत हो गई, जबकि 12 लोगों को अस्पताल में भर्ती कराया गया। लोगों ने घटना के बाद खौफनाक मंजर को बयां किया।
लुधियाना गैस लीक स्थल से करीब 500 मीटर की दूरी पर गली में हेयर ड्रेसर की दुकान करते जतिंदर ठाकुर ने बताया कि वह सुबह सात बजे के करीब अपने काम में व्यस्त थे। तभी धमाके की आवाज सुनाई दी। पहले लगा कि कहीं पर सिलेंडर फटा है। फिर पता चला कि गैस लीक हुई है।
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गैस की तेज दुर्गंध चारों तरफ फैल चुकी थी। यह दुर्गंभ इतनी भयानक थी कि लोग नाक और मुंह बांधकर किसी सुरक्षित जगह की तलाश में इधर-उधर भाग रहे थे। कुछ लोगों ने बताया कि आंखों में जलन होने लगी और दिमाग सुन्न हो गया। लोग बेहोश होकर गिर गए।
जतिंदर ठाकुर ने बताया कि पहले आगे जाकर देखने का मन हुआ, लेकिन दम घोंटू दुर्गंध की वजह से आगे बढ़ने की हिम्मत नहीं हुई और उलटी दिशा में दूर तक भागने के बाद एक दुकान में शरण ली।
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फिर भी समझ में नहीं आ रहा था कि आखिर हुआ क्या है। कुछ देर बाद पुलिस की गाड़ियां आई तो पता चला कि इतना बड़ा हादसा हुआ है। जतिंदर ने कहा कि शुक्र है आगे नहीं गए, वरना जिंदा वापस नहीं लौटते। जब तक कुछ समझ में आया, तब तक कई लोगों की मौत हो चुकी थी।
इलाके में चीख-पुकार मची हुई थी। हर तरफ पुलिस और एंबुलेंस के सायरन सुनाई दे रहे थे। वहीं, देर शाम तीन डॉक्टरों पर आधारित एक बोर्ड ने 10 शवों का पोस्टमार्टम कर उनका विसरा जांच के लिए भेज दिया है।
थाना साहनेवाल की पुलिस ने डॉ. अभिलाष और उनके पारिवारिक सदस्यों के शव बिहार उनके गांव भेज दिए गए। गोयल परिवार के शव उनके परिवार वालों के हवाले कर दिए हैं। फॉरेंसिक एक्सपर्ट डॉक्टर चरण कमल, डॉक्टर सौरभ और डॉक्टर गीतांजलि का कहना है कि जांच रिपोर्ट आने के बाद ही मौत का कारण स्पष्ट हो सकेगा। सभी लोगों के दिमाग में गैस चढ़ गई थी जिसका उनकी मौत हो गई।
आप विधायक भी पहुंची घटनास्थल
आम आदमी पार्टी की विधायक राजिंदरपाल कौर छीना सूचना मिलते ही मौके पर पहुंच गई। वह घटनास्थल से कुछ ही दूरी पर खड़ी रही। हालांकि वहां पर भी कुछ असर था। हालांकि कुछ अधिकारियों ने उन्हें दूर जाने की सलाह दी थी, लेकिन उन्होंने साफतौर पर मना कर दिया और कह दिया कि इलाके के लोग भी उन्हीं के हैं और उनके परिवार के सदस्यों की तरह हैं।
वह लगातार प्रशासन और सरकार के संपर्क में हैं और जो लोग घायल हैं उनकी सेहत का भी हालचाल लगातार ले रही हैं। करीब साढ़े तीन घंटे बाद उन्हें भी घबराहट सी महसूस होने लगी तो प्रशासन ने उन्हें वहां से जाने की सलाह दी। कुछ समय बाद वह फिर से घटनास्थल पर पहुंचने के बाद सिविल अस्पताल में भी घायलों से मिलीं।